सुरक्षा मसलों के लिए ज्यादा वक्त निकालें नारायणन: रिबेरो

रिबेरो ने नारायणन को बखूबी जानने का दावा करते हुए कहा कि वे क्षमता से अधिक जिम्मेदारियों का भार कंधों पर ले लेते हैं। उन्होंने राजधानी के एक राजनीतिज्ञ की इस टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2008 में नारायणन ने 250 दिन विदेश में बिताए थे।

रिबेरो की टिप्पणियां एक पुस्तक '26/11 मुंबई एटैक्ड' से ली गई हैं। रिबेरो के अनुसार भारत अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते और भारत-चीन सीमा विवाद जैसे मसलों में व्यस्तता के कारण नारायणन के पास अांतरिक सुरक्षा से जुड़े मसलों के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिला, जिनमें वास्तव में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है।

रिबेरो ने कहा कि यह स्पष्ट है कि बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां होने की वजह से वह उस दौरान (मुंबई हमलों के दौरान)चूक गए। वह अब युवा नहीं हैं और उन्हें अपने कुछ अधिकार और जिम्मेदारियां युवा लोगों में बांट देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में तत्काल पुलिस सुधार लाने की जरूरत है ताकि पुलिस बल आतंकवादी चुनौतियों का बेहतर ढंग से मुकाबला कर सकें। मुंबई के पुलिस प्रमुख रह चुके रिबेरो ने कहा कि देश की जनता विशेषकर मुखर मध्यम वर्ग को सरकार से पुलिस सुधारों की मांग करनी चाहिए। अफसोसजनक है कि यह अभी तक नहीं हो सका।

रिबेरो ने कहा कि अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी के बावजूद जासूसों द्वारा और आतंकवादियों के गुटों में अपने लोगों को भेजकर खुफिया जानकारियां एकत्र किए जाने का महत्व हमेशा रहेगा।

उन्होंने कहा, "यदि जनता और पुलिस के बीच संबंध स्वस्थ एवं परस्पर विश्वास और सम्मान पर आधारित हैं तो बेहतर ढंग से खुफिया जानकारियां जुटायी जा सकेंगी जिनसे आतंकवादी हमला टाला जा सकेगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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