बांग्लादेश में मृतकों संख्या 81 हुई, राष्ट्रीय शोक की घोषणा (लीड-1)

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) के जवानों द्वारा किए गए दो दिवसीय हिंसक विद्रोह की निंदा की है।

ढाका में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय से शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मून ने हिंसा की इस क्रूर कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और पीड़ितों, उनके परिजनों तथा बांग्लादेश सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। महासचिव ने बगैर किसी हिंसा के इस परिस्थिति के समाधान व शांति की अपील की है।

इस बीच बांग्लादेश सेना के प्रमुख जनरल मोईन यू. अहमद ने कहा है कि सेना सरकार के प्रति पूरी तरह वफादार है। बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) के जवानों द्वारा विद्रोह की घटना पर सेना के प्रमुख जनरल मोईन यू. अहमद ने कहा, "हमें एक दूसरे के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए। सेना ने लोगों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी थी।"

उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हुआ उससे सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि पूरे देश की अपूरणीय क्षति हुई है। हमें यह सोचना होगा कि हम इससे कैसे उबरेंगे।" सेना प्रमुख ने कहा, "जरा उन बच्चों के बारे में सोचिए जिन्होंने अपने पिता खो दिए या फिर उन पत्नियों के बारे में भी जो विधवा हो गईं।"

उधर बीडीआर मुख्यालय में सेना का तलाशी अभियान जारी है। मुख्यालय के भीतर से मिली दो कब्रों से शनिवार को 10 क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए। इनमें एक शव महिला का है। बचाव दल का नेतृत्व करने वाले अग्निशमन सेवा के प्रमुख अबु नईम ने बताया कि सेना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के 2000 से ज्यादा सदस्य बीडीआर मुख्यालय की तलाशी ले रहे हैं।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि 50 सैन्य अधिकारी अभी तक लापता हैं। गृहमंत्री सहरा खातून ने शुक्रवार शाम को कहा था कि सेना के 40 अधिकारियों के शव बरामद किए जा चुके हैं। बीडीआर प्रमुख शकील अहमद का शव भी बरामद हो चुका है। दो शव गटर से बरामद हुए हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से की गई आम माफी की पेशकश के बाद बागियों द्वारा समर्पण कर देने पर गुरुवार को बगावत थम गई थी। देश की सरहद की हिफाजत का दायित्व संभालने वाला बीडीआर गृह मंत्रालय के अधीन आता है लेकिन उसके सभी वरिष्ठ अधिकारी सेना से हैं।

बांग्लादेश में हुई बीडीआर बगावत की अगुवाई उसके 20 से 25 नॉन- कमीशंड सुरक्षाकर्मियों ने की और उसके बाद अन्य सुरक्षाकर्मियों को भी विद्रोह करने और उसके बाद के खून-खराबे में शामिल होने के लिए मजबूर किया था। यह जानकारी गोलीबारी में जिंदा बचे अधिकारियों और कुछ बागियों ने दी।

स्थानीय समाचार पत्र 'द डेली स्टार' ने खबर दी है कि बीडीआर के मुख्यालयों में मौजूद सुरक्षाकर्मियों के एक छोटे गुट ने ही सेना के अधिकारियों की हत्याएं कीं।

बीडीआर के जवानों ने बुधवार को कम वेतन और कामकाज के खराब माहौल को लेकर बगावत कर दी थी। उसी दिन सुबह नौ से 11 बजे के बीच ज्यादातर हत्याएं हुईं। मारे गए लोगों में ज्यादातर अधिकारी थे। बगावत के दौरान सबसे ज्यादा हत्याएं दरबार हाल में ही हुई थीं। गोलीबारी को रोकने के प्रयास में बीडीआर के भी कई सुरक्षाकर्मी मारे गए।

गौरतलब है कि बीडीआर के सुरक्षाकर्मियों ने दो दिनों के विद्रोह के बाद गुरुवार शाम आत्मसमर्पण कर दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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