धर्मनिरपेक्षता की मिसाल पेश की शब्बीर ने
शब्बीर की उम्र 55 साल है और गाजियाबाद के राहुल नगर में रहते हैं। आज से 20 साल पहले उन्होंने राखी को गोद लिया था। उन्होंने राखी को हर वह खुशी दी जो एक सगे मां-बाप अपनी औलाद को देते हैं। गुरुवार रात नांगलोई के रहने वाले रंजीत शर्मा नाम के युवक से जब राखी की शादी हुई तो शब्बीर ने अपनी राखी को बाप की हैसियत से विदा किया।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, "मेरा दोस्त शराबी था और राखी की परवरिश नहीं कर पा रहा था। राखी हमारे घर आया करती थी और वह मेरी पत्नी और पूरे परिवार से इतना घुल-मिल गई कि फिर वह हमारे परिवार का अटूट हिस्सा हो गई।"
शब्बीर ने राखी को 10वीं कक्षा तक तालीम भी दिलवाई लेकिन उन्होंने कभी उसे अपना मजहब बदलने और इस्लाम अपनाने के लिए नहीं कहा। उन्होंने राखी को एक कमरा दे रखा था जहां उसके लिए एक छोटा मंदिर भी बनवाया था।
उनका कहना है, "मैंने कुछ भी विशेष नहीं किया है। यह मेरा फर्ज था जिसे मैंने निभाया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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