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जब मिले दो महान नेताओं के वंशज

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जब मिले दो महान नेताओं के वंशज

मार्टिन ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक क्षण है. मैं उस महान नेता के वंशज से मिल रहा हूं जिनसे मेरे पिता को अपने संघर्ष के लिए प्रेरणा मिली थी."

उन्होंने कहा, "मेरे पिता और महात्मा गांधी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं."

किंग तृतीय ने कहा, "अमरीका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति बनकर बराक ओबामा ने मेरे पिता के जिस सपने को सच किया, वह सपना देखने की ताकत और प्रेरणा उनको महात्मा गांधी से ही मिली थी."

जाने-माने नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की भारत यात्रा की स्वर्ण जयंती के मौके पर एक सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने दौरे के आख़िरी चरण में कोलकाता पहुँचे किंग तृतीय का दिन काफी व्यस्त रहा.

सुबह सबसे पहले वे मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के मुख्यालय मदर हाउस पहुंचे. वहां मदर टेरेसा की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने सिस्टर निर्मला से मुलाकात की.

प्रेरणा के स्रोत

इसके बाद वे राजभवन पहुंचे जहां राज्यपाल गांधी ने उनके सम्मान में दोपहर का भोज रखा था.

भोजन करने के बाद किंग ने पूर्व मुख्यमंत्री और अमरीका में भारत के पूर्व राजदूत सिद्धार्थ शंकर राय समेत विभिन्न राजनीतिक हस्तियों से मुलाकात की.

अमरीका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति बनकर बराक ओबामा ने मेरे पिता के जिस सपने को सच किया, वह सपना देखने की ताकत और प्रेरणा उनको महात्मा गांधी से ही मिली थी मार्टिन लूथर किंग तृतीय

अमरीका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति बनकर बराक ओबामा ने मेरे पिता के जिस सपने को सच किया, वह सपना देखने की ताकत और प्रेरणा उनको महात्मा गांधी से ही मिली थी

राजभवन में उन्होंने बताया कि कैसे महात्मा गांधी उनके पिता के लिए प्रेरणास्रोत थे.

राजभवन में गांधी संग्राहलय के निदेशक सुप्रिय मुंशी ने किंग तृतीय को 1968 में संडे शिकागो मेल में छपे एक कार्टून की प्रति भेंट की.

इस कार्टून में महात्मा गांधी को लूथर किंग जूनियर से कहते दिखाया गया है, "ह्त्यारों के बारे में ख़राब बात यह है कि वे समझते हैं कि उन्होंने आपकी हत्या कर दी है."

और उसी साल मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या हो गई थी. मुंशी ने कोलकाता में 1959 में किंग जूनियर का भाषण सुना था.

मार्टिन लूथर किंग सरणी

सुप्रिय मुंशी बताते हैं, "मैंने तब उनसे पूछा था कि आपका आदर्श कौन है?"

उन्होंने बताया, "जवाब में उन्होंने महात्मा गांधी की तस्वीर वाला एक लॉकेट निकाल कर दिखाते हुए कहा था कि गांधी मेरे आदर्श हैं."

मैं उन रास्तों पर चला जहां कभी गांधी चले थे: किंग

राजभवन से गांधी के साथ ही किंग तृतीय महानगर के बेलियाघाटा स्थित गांधी भवन में गए.

अगस्त, 1947 में देश के विभाजन और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में गांधी जी ने अनशन किया था.

किंग तृतीय उस समय सबसे ज्यादा भावुक हो उठे जब शाम को महानगर में अपने पिता के पदचिन्हों की तलाश में वे मार्टिन लूथर किंग सरणी पहुंचे.

वहां एक छोटे से समारोह का आयोजन किया गया था. पहले इस सड़क का नाम अपर वुड स्ट्रीट था जिसे बाद में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की याद में बदलकर मार्टिन लूथर किंग सरणी नाम दिया गया.

वहां पत्रकारों से बातचीत में मार्टिन लूथर किंग तृतीय ने कहा, "मेरे पिता को अपनी भारत यात्रा के बाद इस बात का भरोसा हो गया था कि आज़ादी की लड़ाई में शोषितों के लिए अहिंसा ही सबसे बड़ा और असरदार हथियार है."

श्रद्धांजलि अर्पित

उन्होंने कहा, "मैं यहां आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं."

उनके अनुसार, "मेरे पिता को दी गई इस श्रद्धांजलि ने मुझे उनके सपनों को साकार करने की दिशा में और मजबूती से काम करने की प्रेरणा दी है."

मेरे पिता को अपनी भारत यात्रा के बाद इस बात का भरोसा हो गया था कि आज़ादी की लड़ाई में शोषितों के लिए अहिंसा ही सबसे बड़ा और असरदार हथियार है मार्टिन लूथर किंग तृतीय

मेरे पिता को अपनी भारत यात्रा के बाद इस बात का भरोसा हो गया था कि आज़ादी की लड़ाई में शोषितों के लिए अहिंसा ही सबसे बड़ा और असरदार हथियार है

किंग ने कहा कि अपने भारत दौरे के दौरान उनके लिए सबसे यादग़ार क्षण महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करना था.

वे कहते हैं, "मैं उन रास्तों पर चला जहां कभी गांधी चले थे. मैंने कई उन स्थानों का भी दौरा किया जहां वे गए थे."

उन्होंने इस दौरे के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया और कहा, "महात्मा गांधी और मेरे पिता में काफी समानताएं थी."

उन्होंने कहा कि गाँधीजी की कथनी और कथनी ने पूरे संसार को एकसूत्र में पिरोया. अब एक बार फिर शांति, सत्य और अहिंसा के संदेशों को फैलाना जरूरी है.

उन्होंने युवा तबके से इसकी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेने की अपील की.

किंग ने बताया कि उनके पिता कहते थे कि वे बाकी देशों में पर्यटक थे, लेकिन भारत में एक तीर्थयात्री.

किंग तृतीय ने कहा, "मैं एक बार फिर कोलकाता आना चाहता हूं. यह शहर मुझे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है."

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