बांग्लादेश में बीडीआर बगावत की उच्चस्तरीय जांच शुरू (लीड-1)
बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री एवं सेवानिवृत्त कर्नल मोहम्मद फारूक खान ने बताया कि जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इस बगावत के पीछे 'अन्य ताकतों' का हाथ तो नहीं था। फारूक खान ने हालांकि यह नहीं बताया कि अन्य ताकतों से उनका क्या अभिप्राय है और जांच एजेंसी की बनावट कैसी है।
सरकार का रुख विपक्ष की नेता और दो बार देश की प्रधानमंत्री रही खालिदा जिया के बयान से मेल खाता है। उन्होंने भी मांग की है कि इस बात की पड़ताल की जाए कि कहीं इस विद्रोह के पीछे कोई साजिश तो नहीं थी। उन्होंने शांति और एकता बनाए रखने की अपील करते हुए शेख हसीना सरकार को पूर्ण समर्थन देने की पेशकश की है।
फारूक खान ने बीडीआर कर्मियों से संयम बरतने का अनुरोध करते हुए आश्वासन दिया है कि उनकी मांगी चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएंगी।
समाचार पत्र 'द डेली स्टार' ने खबर दी है कि विद्रोह के दौरान घायल हुए सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद कमरुज्जमा ने गुरुवार शाम अहमद के मारे जाने की पुष्टि की।
कमरुज्जमा ने बताया, "अहमद दरबार हॉल की सीढ़ियां उतर रहे थे, तभी एक सुरक्षाकर्मी ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। इसके बाद हम सभी पर गोलियां चलाईं गई।"
उन्होंने बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई तो दरबार हाल में 160 से अधिक अधिकारी मौजूद थे। विद्रोह के दौरान 50 से अधिक लोग मारे गए जिनमें ज्यादातर सेना के जवान और अधिकारी शामिल थे।
उधर बांग्लादेश में लापता सैन्य अधिकारियों की तलाश में शुक्रवार सुबह सेना के टैंक बांग्लादेश राइफल्स(बीडीआर) के मुख्यालय में दाखिल हो गए। इसी मुख्यालय में बीडीआर के सुरक्षाकर्मियों ने सेना के खिलाफ 33 घंटे तक मोर्चा बांधे रखा था।
वेबसाइट बीडी न्यूज 24 डॉट कॉम ने खबर दी है कि सेना के जवान छह टैंकों और 20 बख्तरबंद गाड़ियों के साथ मुख्यद्वार से बीडीआर परिसर में दाखिल हुए।
एक टेलीविजन चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने बीडीआर मुख्यालय में बचाव और तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। दो ब्रिगेडियर जनरलों के नेतृत्व में सेना के दो दल परिसर में दाखिल हुए।
बीडीआर के सुरक्षाकर्मियों की बगावत बुधवार सुबह उस समय भड़क उठी थी जब सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यालय का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बागियों को आम माफी देने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने हथियार डालने से मना कर दिया।
सेना द्वारा बीडीआर मुख्यालय के बाहर पोजीशन लेने और बागियों द्वारा हथियार डालने के बाद ही बगावत पर काबू पाया जा सका।
गौरतलब है कि बीडीआर के सुरक्षाकर्मियों ने दो दिनों के विद्रोह के बाद गुरुवार शाम को आत्मसमर्पण कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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