एजेंट की दगाबाजी से 50 से अधिक भारतीय कामगार मलेशिया में फंसे
इन कामागारों को कुआलालंपुर में भारतीय उच्चायोग से शिकायत करने से भी रोका जाता रहा। कामगारों के मुताबिक उनके एजेंट ने वर्क परमिट की अवधि खत्म होने के बाद उनकी वतन वापसी के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इन सभी का वर्क परमिट सात महीने पहले ही समाप्त हो गया है।
इनका शोषण यहीं नहीं थमा। एजेंट उनका अंतिम वेतन भी डकार गया। उनका अंतिम महीने का सामूहिक वेतन 14,000 डॉलर है। इनमें से आठ मजदूरों ने मलेषिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस(एमटीयूसी) से इसकी शिकायत की। संगठन के महासचिव जी़ राजसेकरन ने सोमवार को आप्रवासन विभाग को पत्र के जरिए इसकी जानकारी दी।
राजसेकरन ने पत्र में इसका जिक्र किया है कि इन कामगारों को एक अनुबंध के तहत जुलाई 2005 से जुलाई 2008 तक जोहोर बारू इलाके के एक संयंत्र में काम करने के लिए लाया गया।
अनुबंध के मुताबिक इन सभी को तीन वषरें की अनुबंध अवधि खत्म होने के बाद वापस भेजने की जिम्मेवारी उनके रोजगार एजेंट की थी। एजेंट ने इन्हें वापस भेजने के बजाए उन्हें दिसंबर तक काम जारी रखने को कहा। इस बीच इनके वर्क परमिट के नवीनीकरण के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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