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चटर्जी ने कहा, साम्यवाद पर किसी पार्टी का एकाधिकार नहीं (लीड-1)

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14 वीं लोकसभा के निश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही उनके चार दशक लंबे संसदीय जीवन पर भी विराम लग गया।

बेफिक्र दिख रहे चटर्जी ने संवाददाताओं से कहा, "साम्यवाद पर किसी पार्टी का एकाधिकार नहीं है। मैं अभी भी कम्युनिस्ट हूं।" यह पूछने पर कि क्या वे अभी भी कॉमरेड हैं, उन्होंने सवाल पूछने वाले से कहा, "मैं ही नहीं, यहां तक कि आप भी कॉमरेड हैं।"

पिछले साल भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के मसले पर वामदलों द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने उनसे लोकसभा अध्यक्ष का पद छोड़ने को कहा था। चटर्जी के ऐसा नहीं करने पर माकपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।

लोकसभा में अपने विदाई भाषण में चटर्जी ने कहा था, "जब एक बार आप अध्यक्ष बनते हैं आपको पार्टी से खुद को अलग कर लेना चाहिए।" उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए।

यह पूछने पर कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे चटर्जी ने कहा, "जिस घटना का जिक्र कर रहे हैं, मैं उससे (निष्कासन से)बहुत पहले ही कह चुका हूं कि मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा।"

यह पूछने पर कि पश्चिम बंगाल के उनके बोलपुर निर्वाचन क्षेत्र को यदि अनुसूचित जाति की श्रेणी में आरक्षित नहीं किया जाता तो क्या वह चुनाव लड़ते? चटर्जी ने कहा, "मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा।"

लोकसभा अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभवों के बारे में चटर्जी ने सदन में बार-बार पहुंचने वाले व्यवधान पर नाखुशी जताई, लेकिन कहा कि इन अनियमितताओं के बावजूद उन्होंने सदन में अपना कर्तव्य निभाया।

उन्होंने कहा कि सांसदों को देश की प्रगति में भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "बदलाव लाने के लिए मैं अच्छे लोगों से राजनीति में आने की अपील करूंगा।"

अपने कार्यकाल में महिला आरक्षण विधेयक के पारित नहीं हो पाने पर उन्होंने खेद व्यक्त किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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