जीडीपी विकास दर पर मंदी का असर, 5.3 फीसदी हुई (लीड-1)
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जीडीपी दर 8.9 फीसदी थी। वर्ष 2003 के बाद यह दर सबसे कम है।
जीडीपी विकास दर को अर्थव्यवस्था का पैमाना माना जाता है, जो वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.6 फीसदी और पहली तिमाही में 7.9 फीसदी थी।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान औसत विकास दर 6.9 फीसदी रही, जो पिछले वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान नौ फीसदी थी।
ताजा आंकड़ों ने सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक के उस आंकलन पर भी सवाल खड़ा कर दिया है जिसमें चालू वित्त वर्ष में विकास दर सात फीसदी या उससे ऊपर रहने की उम्मीद जाहिर की थी।
तीसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर में 2.2 फीसदी और विनिर्माण सेक्टर में 0.2 फीसदी की गिरावट आई जबकि निर्माण क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से 6.7 फीसदी की गिरावट आई।
तीसरी तिमाही में ठीक ठाक विकास करने वाले सेक्टर खनन (5.3 फीसदी), हॉस्पिटेलिटी, ट्रांसपोर्ट व कम्यूनिकेशंस (6.8 फीसदी), बैंकिंग, बीमा और रियल्टी (9.5 प्रतिशत) और सरकारी सेवा (17.3 फीसदी) रहे।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिस के प्रमुख अर्थशास्त्री डी. के. जोशी ने कहा, "कृषि में गिरावट जीडीपी विकास दर में कमी की एक मुख्य वजह रही है। 2.2 फीसदी के नकारात्मक विकास ने काफी असर डाला है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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