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रैनबैक्सी पर अमरीका का नया आरोप

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रैनबैक्सी पर अमरीका का नया आरोप

अमरीका में दवाओं का नियमन करने वाली एजेंसी ने कहा है कि भारत की दवा कंपनी रैनबैक्सी ने कई जेनेरिक दवाओं के परीक्षण परिणामों में जालसाज़ी की है.

अमरीका की दवाओं का नियमन करने वाली सरकारी संस्था 'फ़ेडरल ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन' यानी एफ़डीए ने कहा है कि उन्होंने कंपनी की पाँवटा साहिब स्थित कारखाने में बनी नई दवाओं को लाइसेंस देने के आवेदन पर विचार को फ़िलहाल स्थगित कर दिया है.

हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि बाज़ार में इस कंपनी को जो दवाएँ हैं उनसे स्वास्थ्य को किसी तरह का ख़तरा नहीं है.

पिछले साल एफ़डीए ने रैनबैक्सी के इसी कारखाने में बनी कई दवाओं और एक अन्य कारखाने में बनी लगभग 30 दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था. उस समय कहा गया था कि अमरीकी एजेंसी ने इन कारखानों में दवा निर्माण की प्रक्रिया में कई खामियाँ पाईं थीं.

रैनबैक्सी ने एफ़डीए के इस फ़ैसले को निराशाजनक बताया था और कहा था कि एजेंसी की सारी शिकायतों को दूर करने के बावजूद दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया.

शिकायत

एफ़डीए के नियामकों ने कहा है कि एक साल लंबी जाँच से पता चला है कि रैनबैक्सी ने दवाओं के शेल्फ़ लाइफ़ यानी उस अवधि की जाँच ठीक तरह से नहीं की जिसमें दवा प्रभावशाली रहती है.

उनका कहना है कि इसके अलावा कई अन्य परीक्षण भी ठीक तरह से नहीं किए और फिर जाँच के परिणामों के बारे में झूठी जानकारी दी.

इसका एक उदाहरण देते हुए एफ़डीए ने कहा है कि रैनबैक्सी के अधिकारियों ने परीक्षण के दौरान दवा को रेफ़्रीजरेटर में रखा और कह दिया कि दवाएँ सामान्य तापमान में रखी गईं थीं.

इस समय रैनबैक्सी की जो दवाएँ बाज़ार में हैं उनके संबंध में हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि वे नुक़सानदेह हैं डगलस थ्रॉकमॉर्टन, उपनिदेशक, एफ़डीए

इस समय रैनबैक्सी की जो दवाएँ बाज़ार में हैं उनके संबंध में हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि वे नुक़सानदेह हैं

एफ़डीए ने कहा है कि इस फ़ैसले से प्रभावित होने वाली 25 दवाएँ अमरीका पहुँचने वाली हैं लेकिन उन्हें दवा दुकानों तक पहुँचने में कई महीनों का समय लगेगा.

वैसे परीक्षण के आंकड़ों में गड़बड़ी के बाद भी एफ़डीए ने कहा है कि उन्हें कोई सबूत नहीं मिले हैं कि ये दवाएँ ख़तरनाक हैं.

एफ़डीए ने कहा है कि मरीज़ इन दवाओं को लेना जारी रख सकते हैं.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एफ़डीए के उप निदेशक डगलस थ्रॉकमॉर्टन ने कहा है, "इस समय रैनबैक्सी की जो दवाएँ बाज़ार में हैं उनके संबंध में हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि वे नुक़सानदेह हैं."

उनका कहना था, "हमें इन दवाओं की बिक्री जारी रहने देने में कोई नुक़सान नज़र नहीं आ रहा है." पाँवटा साहिब कारखाने के अलावा रैनबैक्सी के तीन और कारखानों की दवाएँ अमरीका आयात की जाती हैं.

इनमें कम क़ीमतों वाली कोलेस्टोरॉल घटाने वाली दवाएँ और सस्ती एंटीबायोटिक दवाएँ शामिल हैं. अभी एफ़डीए ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह रैनबैक्सी की कितनी दवाओं के लाइसेंस आवेदन पर विचार की प्रक्रिया स्थगित कर रही है.

वैसे एफ़डीए का कहना है कि पिछले चार सालों में उसके अधिकारियों ने 20 से अधिक बार इन कारखानों का दौरा किया लेकिन उन्हें इस तरह की कोई कमी दिखाई नहीं दी.

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ बरसों में रैनबैक्सी और डॉ रेड्डीस लैबोरेटरी जैसी कंपनियों के कारण भारत जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है. इनकी दवाएँ अपेक्षाकृत सस्ती भी हैं.

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