'विशेषाधिकार क़ानून हटाने की प्रक्रिया शुरु'

गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में विपक्षी सदस्यों के सवाल के जवाब में कहा कि विशेषाधिकार क़ानून को हटाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है.
उनका कहना था, "हमारी सरकार सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम और अशांत क्षेत्र अधिनियम को राज्य से हटाने की प्रक्रिया शुरु कर चुकी है."
उमर की घोषणा से पहले विधानसभा में घाटी से संबंध रखने वाले अधिकतर सदस्यों ने माँग की कि सुरक्षा बल को मिले हुए विशेषाधिकारों को हटाया जाए और सेना को बैरक में भेजा जाए.
विशेष अधिकार
ग़ौरतलब है कि वर्ष 1990 में राज्य में सुरक्षा बल विशेषाधिकार क़ानून को लागू किया गया था. इस क़ानून के अंतर्गत सैन्यबलों को अशांत क्षेत्रों में कार्रवाई करने के लिए विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं.
हमारी सरकार सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम और अशांत क्षेत्र अधिनियम को राज्य से हटाने की प्रक्रिया शुरु कर चुकी है
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि इस क़ानून को हटाने के सिलसिले में पहला क़दम उठाया जा चुका है और श्रीनगर में अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की जगह राज्य पुलिस को तैनात किया गया है.
विधानसभा में उमर की इस घोषणा का ज़ोरदार तालियों से स्वागत किया गया.
इससे पहले विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ़्ती 'कश्मीर में आतंक के शासन को जारी रखने' जैसी बातें कह कर राज्य सरकार पर बरस पड़ी थीं.
उनका कहना था," कश्मीर में लोगों को उनके घरों से निकाल कर मारा जा रहा है, ऐसा कर ख़ौफ़ का माहौल बनाया जा रहा है. इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए."
महबूबा ने भी माँग की सेना को बैरक में वापस भेजा जाना चाहिए.


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