विद्रोह के दौरान 50 के मारे जाने की आशंका

विद्रोह के दौरान 50 के मारे जाने की आशंका

क़ानून और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री मोहम्मद क़ुआमरुल इस्लाम ने कहा है, "छिटपुट हिंसा में लगभग 50 लोग मारे गए हैं."

बांग्लादेश राइफ़ल्स के विद्रोही जवानों और प्रधनामंत्री शेख़ हसीना के बीच समझौता होने के कुछ घंटों बाद बाद जवानों ने हथियार डालने शुरु कर दिए हैं और बंधक बनाए गए महिलाओं और बच्चों को रिहा करना शुरु कर दिया है.

शेख़ हसीना ने बांग्लादेश राइफ़ल्स के विद्रोदी जवानों को आम माफ़ी देने का प्रस्ताव रखा है.

उल्लेखनीय है कि राजधानी ढाका में बांग्लादेश राइफ़ल्स के मुख्यालय पर जवानों ने बुधवार सुबह विद्रोह कर दिया था.

इसके मुख्यालय में सेना और बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवानों के बीच भीषण गोलीबारी हुई थी.

कहा जा रहा है कि वेतन, काम का वातावरण और तरक्की के सवालों पर नाराज़ जवानों ने विद्रोह कर दिया.

संघर्ष

बुधवार की सुबह ढाका के पिलख़ाना इलाक़े में विद्रोहियों ने सैनिक बैरकों को घेर लिया और सौ से अधिक लोगों को बंधक बना लिया था.

सेना और पुलिस के हज़ारों जवानों ने इस पूरे इलाक़े को घेर लिया और विद्रोह को कुचलने की कोशिश की.

इस प्रयास में सेना और पुलिस के जवानों और विद्रोहियों के बीच कई घंटे संघर्ष चलता रहा.

हमने जो किया उसका फल हमारे परिवार को भुगतना पड़ेगा लेकिन वे 200 साल से अधिक समय से हमारा शोषण कर रहे थे एक विद्रोही

हमने जो किया उसका फल हमारे परिवार को भुगतना पड़ेगा लेकिन वे 200 साल से अधिक समय से हमारा शोषण कर रहे थे

हालांकि मंत्री ने 50 लोगों के मारे जाने की बात कही है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कुल कितने लोग मारे गए हैं और कितने लोग घायल हुए हैं, क्योंकि गोलीबारी में आसपास से गुज़र गए लोग भी इसकी चपेट में आ गए थे.

विद्रोह की इस घटना के बाद ढाका में दुकानें बंद करा दी गईं और सड़कों पर लोगों के चलने-फिरने पर भी पाबंदी लगा दी गई.

विद्रोह के दौरान बंधक बनाए गए लोगों के बारे में भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है.

विद्रोह करने वाले जवानों में से एक ने बीबीसी से कहा कि अपने अधिकारियों के साथ चल रही समस्या को सुलझाने के लिए विद्रोह का रास्ता अपनाना पड़ा.

उसने कहा, "हमने जो किया उसका फल हमारे परिवार को भुगतना पड़ेगा लेकिन वे 200 साल से अधिक समय से हमारा शोषण कर रहे थे."

ढाका में घटनास्थल पर मौजूद बीबीसी के संवाददाता मार्क डुमेट के मुताबिक़ ऐसा कोई संकेत नहीं हैं कि इस घटना को तख़्तापलट की कोशिश माना जाए.

ग़ौरतलब है कि एक ही दिन पहले प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने बांग्लादेश राइफ़ल्स के मुख्यालय का दौरा किया था और कुछ जवानों को मैडल देकर सम्मानित किया था.

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