उत्तर प्रदेश में एक मंच पर आए 10 छोटे राजनीतिक दल
स्वाभिमान पार्टी (आरएसपी), अपना दल, नेशनल लोकतांत्रिक हिंद, भारतीय समाज पार्टी, आर्थिक स्वतंत्रता दल, राष्ट्रवादी लेबर पार्टी, वंचित जमात पार्टी, राष्ट्रीय कामगार पार्टी समेत प्रदेश के 10 छोटे दलों ने मिलकर इस राजनीतिक मंच को बनाया है, जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विकल्प के तौर पर अपनी दावेदारी पेश करेगा। अभी इस मंच की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बहुजन डेमोक्रेटिक फ्रंट के संयोजक एंव राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विधायक आर.के.चौधरी ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि वे लोग बसपा का विकल्प तैयार करने के लिए एकजुट हुए हैं। विकल्प की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि स्व. कांशीराम ने दलितों, मजलूमों एवं अल्पसंख्यकों को एकजुट करके जिस पार्टी का गठन किया है उस पर आज मनुवादियों का कब्जा हो गया है। कांशीराम जिनसे फासला बनाकर रहते थे आज वही लोग बसपा में हावी हैं। इससे दलित अपने को ठगा महसूस कर रहा है। इसके अलावा आज हर राजनीतिक दल मनुवाद से ग्रस्त है। ऐसे में हमारा मंच सशक्त विकल्प के रूप में उभरेगा।
बहुजन डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाने वाले इन दलों में ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो कभी न कभी बहुजन समाज पार्टी में रह चुके हैं। वहां से निकलने के बाद अपनी-अपनी पार्टियां चला रहे हैं।
चौधरी ने कहा कि जल्द ही एक रैली कर इस मंच के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
जिन नेताओं ने बसपा के खिलाफ यह एकजुटता दिखाई है उसमें राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी के आर. के. चौधरी के अलावा अपना दल के सोनेलाल पटेल, नेशनल लोकतांत्रिक हिंद के डा. मसूद अहमद, भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर, आर्थिक स्वतंत्रता दल के सुरेंद्र कुशवाहा, राष्ट्रवादी लेबर पार्टी के रणवीर सिंह पाल, वंचित जमात पार्टी के चतरसिंह कश्यप, राष्ट्रीय कामगार पार्टी के पीसी पातंजलि, सर्वोदय क्रांति पार्टी के राजाराम पाल तथा लोकप्रिय समाज पार्टी के जयराम सिंह जय प्रजापति सम्मिलित हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद फ्रंट क्या किसी बड़े राजनीतिक दल से समझ्झौता करेगा। इस सवाल के जवाब में अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल ने कहा कि फिलहाल हमने किसी दल से गठबंधन के बारे में विचार नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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