'अमरीका में हो सकते हैं मुंबई जैसे हमले'

एफ़बीआई के निदेशक रॉबर्ट म्यूलर ने कहा, "मुंबई के हमलों से साबित होता कि किस तरह चरमपंथी एक बड़े एजेंडे और थोड़े से पैसों के साथ साधारण हथियारों से बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं."
उन्होंने अल-क़ायदा को अभी भी अमरीका के लिए बड़ा ख़तरा बताते हुए कहा कि इसके साथ ही कमज्ञात और छोटे चरमपंथी संगठनों की ओर भी ध्यान देना होगा.
उन्होंने घरेलू स्तर पर पैदा होने वाले चरमपंथियों की भी बात कही है.
चेतावनी
एफ़बीआई उन छोटे समूहों को लेकर चिंतित है, जो अपने आपको अल-क़ायदा और उसके आदर्शों से जोड़कर देखते हैं. हो सकता है कि इनका अल-क़ायदा से कोई वास्तविक संपर्क ही न हो रॉबर्ट म्यूलर, निदेशक, एफ़बीआई
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वॉशिंगटन के 'काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स' में दिए गए एक भाषण में रॉबर्ट म्यूलर ने कहा, "दुनिया के कितने देश इस तरह के हमलों के शिकार हो सकते हैं? और इनमें से कितने शहर अमरीका के हो सकते हैं?"
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार उन्होंने कहा, "मुंबई हमला सवाल खड़ा करता है कि क्या ऐसा हमला सियाटेल या सैन डियागो, मियामि या मैनहटन में हो सकता है?"
अल-क़ायदा के अलावा छोटे चरमपंथी गुटों के ख़तरों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने कहा, "एफ़बीआई उन छोटे समूहों को लेकर चिंतित है, जो अपने आपको अल-क़ायदा और उसके आदर्शों से जोड़कर देखते हैं. हो सकता है कि इनका अल-क़ायदा से कोई वास्तविक संपर्क ही न हो."
पिछले अक्तूबर में सोमालिया में हुए आत्मघाती हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने घरेलू स्तर पर चरमपंथी तैयार होने के ख़तरे की भी चेतावनी दी.
मुंबई हमलों की जाँच
मुंबई में हुए हमलों में 170 से अधिक लोगों की जानें गई थीं
वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार इस भाषण के दौरान रॉबर्ट म्यूलर ने पहली बार मुंबई हमलों की जाँच में भारतीय अधिकारियों को एफ़बीआई की ओर से दिए जा रहे सहयोग का भी ब्यौरा दिया.
उन्होंने बताया कि एफ़बीआई के स्पेशल एजेंट स्टीव मेरिल को एफ़बीआई के दिल्ली ऑफ़िस में एक क्रिकेट मैच की तैयारियों के लिए भेजा गया था लेकिन उन्होंने मुंबई जाकर ताज होटल में फँसे अमरीकियों को बचाया और फिर एफ़बीआई टीम की वहाँ पहुँचने से पहले की तैयारियाँ कीं.
अख़बार के अनुसार उन्होंने बताया कि एफ़बीआई टीम ने एकमात्र जीवित बचे हमलावर अजमल आमिर कसाब सहित कोई 60 लोगों से पूछताछ की है.
उन्होंने यह भी बताया कि फ़ोरेंसिक विशेषज्ञों ने किस तरह एक नष्ट हो गए मोबाइल से उंगलियों के निशान लिए और फिर उसे जोड़कर किस तरह से जानकारियाँ जुटाईं.
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मुंबई पुलिस के एक दल ने अमरीका जाकर एफ़बीआई से मुंबई हमलों की जाँच के दौरान जुटाए गए सबूत हासिल किए थे.


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