भारत की अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना

भारत ने अंतरिक्ष में अपने यात्रियों को भेजने के लिए ढाई अरब डॉलर की राशि निर्धारित की है. भारत 2015 तक अंतरिक्ष में अपने यात्री भेजना चाहता है.
योजना आयोग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है. ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल भी इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर देगा.
अभी तक केवल तीन देशों- अमरीका, रूस और चीन ने अपने अंतरिक्ष यानों से यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने में सफलता हासिल की है.
भारत इन तीनों देशों के समकक्ष आना चाहता है.
यान को 2015 में प्रक्षेपित किए जाने की योजना है. इसमें दो अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा जो लगभग एक सप्ताह तक कक्षा में रहेंगे एस सतीश, इसरो के प्रवक्ता
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भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ये मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने की योजना की दिशा में एक और क़दम है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रवक्ता एस सतीश का कहना है,'' ऐसे यान को 2015 में प्रक्षेपित किए जाने की योजना है. इसमें दो अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा जो लगभग एक सप्ताह तक कक्षा में रहेंगे.''
उनका कहना था,'' हमें अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण की सुविधा भी स्थापित करनी है, अंतरिक्ष कैप्सूल भी तैयार करना होगा. ऐसी कई अहम तकनीकि चुनौतियाँ हमारे सामने हैं.''
उल्लेखनीय है कि 25 साल पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा रूसी अंतरिक्ष यान में बैठकर चाँद पर पहुँचे थे. हालांकि भारत आधिकारिक रूप से कहता रहा है कि उसकी चीन के साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, लेकिन चीन की इस क्षेत्र में बढ़त को देखकर भारत में चिंता है.
चीन को दुनिया में सस्ते में उपग्रह प्रक्षेपित करनेवाले देश के रूप में जाना जाने लगा है. भारत इस क्षेत्र में उससे प्रतिस्पर्धा करना चाहता है. अंतरिक्ष कार्यक्रम को धनराशि उपलब्ध कराकर भारत सरकार दोनों देशों के इस अंतर को पाटना चाहती है.


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