गुजरात में बड़ी संख्या में टीकाकरण

अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो हफ़्तों में सबरकाँठा ज़िले में इस बीमारी से कम से कम 43 लोगों की मौत हो चुकी है.
पुलिस उस डॉक्टर की तलाश कर रही है जिस पर बिना सुई बदले बहुत से लोगों को इंजेक्शन लगाने का आरोप है.
हैपेटाइटिस का विषाणु संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकले द्रव्य के संपर्क में आने से फैलता है.
असुरक्षित यौन संबंधों के कारण या संक्रमित सुई के इस्तेमाल से भी ये फैल सकता है. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं से ये बच्चों में भी फैलता है.
सबरकांठा ज़िला अधिकारी एम थेनारासन ने बीबीसी को बताया कि इस बीमारी के लक्षण वाले 80 और लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
जाँच
उन्होंने कहा कि सोमवार को मोडासा तालुका में क़रीब 56 हज़ार लोगों को सरकारी डॉक्टरों ने टीके लगाए जहाँ इस बीमारी का संक्रमण फैला है.
उनके अनुसार बाकी बचे चार हज़ार लोगों को मंगलवार को टीके लगाए जा रहे हैं.
कुछ मरीज़ों ने कहा है कि डॉक्टर ने सुई नहीं बदली या डिस्पोज़ेबल सिरिंज का प्रयोग नहीं किया एम थेनारासन
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केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी इस बीमारी के फैलने के कारणों की जाँच कर रहे हैं.
एम थेनारासन ने बताया कि शुरूआती जाँच में पता लगा है कि कुछ मरीज़ों को एक स्थानीय डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाए थे. इस डॉक्टर ने शहर में पिछले कुछ ही महीनों से क्लीनिक शुरू किया है.
उन्होंने कहा, "कुछ मरीज़ों ने कहा है कि डॉक्टर ने सुई नहीं बदली या डिस्पोज़ेबल सिरिंज का प्रयोग नहीं किया."
पुलिस इस लापता हो चुके डॉक्टर की तलाश कर रही है और उसके क्लीनिक को सील कर दिया गया है.
एम थेनारासन ने कहा, "यही इस शहर में इस बीमारी के फैलने का प्रमुख कारण हो सकता है. हालाँकि हम दूसरे कारणों से भी इनकार नहीं कर सकते."
इससे पहले अधिकारियों ने कहा कि इस बीमारी के मरीज़ किसी ख़ास वर्ग या जाति के नहीं है.
हैपेटाइटिस के लक्षणों में विषाणु बुख़ार, थकान, माँसपेशियों या जोड़ों का दर्द, भूख न लगना और उल्टी होना शामिल है.
इस वायरस के कारण बुख़ार, थकावट, जोड़ों में दर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है.
ऐसे लोगों में लीवर के कैंसर और सिरोसिस जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा रहता है क्योंकि हैपेटाइटिस बी वायरस लीवर को बुरी तरह प्रभावित करता है.


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