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उत्पाद शुल्क और सेवा करों में कटौती

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उत्पाद शुल्क और सेवा करों में कटौती

जहां सामान्य उत्पाद शुल्क की दर दस प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दी गई है वहीं सेवा कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर दस प्रतिशत कर दी गई है.

सरकार ने उद्योग जगत के लिए दिसंबर में जिस पैकेज की घोषणा की थी उसमें भी उत्पाद शुल्क में चार प्रतिशत की कमी की गई थी.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में अंतरिम बजट पर बहस के दौरान कहा कि उत्पाद शुल्क की नई दरें अगले वित्त वर्ष यानी 31 मार्च के बाद भी लागू रहेंगी.

लोकसभा ने अंतरिम बजट को ध्वनि मत से पारित कर दिया है जबकि विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और पूर्व में सरकार का समर्थन कर रहे वाम दलों ने वाकआउट किया.

मुखर्जी ने बताया कि बड़ी मात्रा में सीमेंट पर उत्पाद शुल्क को घटाकर दस प्रतिशत से आठ प्रतिशत किया गया है.

वित्त मंत्री का कहना था कि विशेष आर्थिक ज़ोन को आपूर्ति करने वाले लोगों को निर्यात से जो नुकसान हो रहा था उस पर भी बजट में विचार किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि सरकार के राहत पैकेज के तहत राज्यों को सकल घरेलू उत्पाद का अतिरिक्त 0.5 प्रतिशत उधार लेने की अनुमति मिली है जो अगले वित्त वर्ष में जारी रहेगी.

उद्योग जगत के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठाने के आरोपों के बारे में वित्त मंत्री का कहना था कि उन्हें संसदीय मर्यादा का ख़्याल रखना था और ऐसे समय में जब सरकार का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है तो इस बजट में अधिक कुछ नहीं कर सकते थे.

मुखर्जी का कहना था कि सरकार ने और रिज़र्व बैंक ने अर्थव्यवस्था को दुरस्त करने के लिए जो उपाय किए हैं उसका प्रभाव देखने में अभी समय लगेगा.

उनका कहना था कि अर्थव्यवस्था में भारी मात्रा में पैसा डाला गया है जिससे बैंकों ने अपनी ब्याज़ दरें कम की हैं.

पिछले वर्ष सितंबर महीने से अबतक रिज़र्व बैंक ने अर्थव्यवस्था में अलग अलग तरीकों से क़रीब चार लाख करोड़ रुपए डाले हैं और कई नीतिगत परिवर्तन किए हैं जिससे की बैंकों को अपनी ब्याज़ दरें कम करने में सफलता मिली है.

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