कार्बन पर नज़र रखने वाला उपग्रह 'नाकाम'

कुछ वैज्ञानिकों ने बताया है कि अमरीकी अंतरिक्ष संगठन नासा का उपग्रह प्रक्षेपण के बाद अपने रॉकेट से अलग नहीं हो पाया.
अभी आधिकारिक तौर पर मिशन की नाकामी की पुष्टि नहीं की गई है.
टॉरस एक्सएल यान ओसीओ को 705 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थापित करने वाला था लेकिन रॉकेट के ऊपरी सिरे पर स्थित ढक्कन ही नहीं खुला जिसके अंदर मौजूद उपग्रह बाहर निकल सके.
इस मिशन को ऑरबिटिंग कार्बन ऑब्ज़रवेटरी (ओसीओ) नाम दिया गया था.
धरती की सतह पर मौजूद उन प्रमुख जगहों का पता लगाने में यह मिशन सहायता पहुँचाने वाला था जहाँ कार्बन डायऑक्साइड गैस का उत्सर्जन और अवशोषण किया जाता है.
इस मिशन को कैलिफ़ोर्निया के वेनडेनबर्ग नौसैनिक अड्डे से अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया था.
जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करने वाली दुनिया की प्रमुख एजेंसियाँ आगाह करती रही हैं कि वातावरण में कार्बन डायऑक्साइड की बढ़ती मात्रा दुनिया में जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है.
उम्मीद की जा रही थी कि ओसीओ से जो आँकड़े मिलेंगे उससे जलवायु परिवर्तन का अनुमान ज़्यादा ठीक ढंग से किया जा सकेगा.
अभी दुनिया के क़रीब 100 जगहों से कार्बन डायऑक्साइड के नमूनों को इकट्ठा किया जाता है. यह नया उपग्रह धरती के हर चक्कर में कार्बन डायऑक्साइड गैस की उत्सर्जन और अवशोषण को क़रीब 30 हज़ार बार माप लेने वाला था.
वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रकृति में प्रति वर्ष 330 अरब टन कार्बन का उत्सर्जन और अवशोषण होता है जिसमें 8 अरब टन कार्बन वातावरण में मानवीय क्रियाकलापों की वजह से उत्सर्जित होता है.
हालांकि मानवीय क्रियाकलापों की वजह से कार्बन की जो मात्रा वातावरण में इकट्ठा होती है वह बेहद कम है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती की सतह के तापमान को बढ़ाने के लिए यह काफ़ी है.


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