अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए उत्पाद शुल्क और सेवा कर में कटौती (राउंडअप)

सरकार के इस कदम को अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक संकट से बचाने के लिए जारी किया गया तीसरा आर्थिक पैकेज माना जा रहा है। मुखर्जी ने लोकसभा में कहा कि पिछले तीन वर्षो के दौरान नौ फीसदी से अधिक की दर के साथ विकास करने वाली अर्थव्यवस्था मौजूदा आर्थिक संकट से पार पाने में सफल होगी।

मुखर्जी ने कहा कि कर में कटौती से राजकोष पर 30,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मूल्यवर्धित कर में 12 दिसम्बर को घोषित चार फीसदी की कटौती को 31 मार्च के बाद जारी रखा जाएगा।

लोकसभा में अंतरिम बजट पर हुई बहस का जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने पिछले दो महीनों के दौरान अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं और उसके परिणाम जल्द सामने आएंगे।

उन्होंने उत्पाद शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किए जाने, विद्युत उत्पादन के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले नेफ्था के आयात पर से सीमा शुल्क समाप्त किए जाने और करयोग्य सेवाओं पर लगने वाला सेवा कर 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किए जाने की बात कही।

सीमेंट के मामले में उन्होंने उत्पाद शुल्क घटाकर आठ फीसदी करने या प्रति टन 230 रुपये के विशेष शुल्क के बीच जो भी अधिक हो उसे लागू करने का प्रस्ताव रखा। इससे प्रति बोरी 3.50 रुपये का लाभ होगा।

इसका तत्काल असर उद्योग जगत पर देखने को मिला। कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी और इस्पात निर्माता कंपनी जिंदल ग्रुप ने वादा किया है कि वे इस कर छूट का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाएंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इन उपायों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा और इससे मांग को बढ़ावा मिलेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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