भारत की श्रीलंका के अशांत क्षेत्रों से नागरिकों को हटाने की अपील
विदेश मंत्रालय ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(लिट्टे) के कब्जे वाले इलाके में फंसे हजारों नागरिकों को वहां से निकालने में सहायता देने भी मंशा जाहिर की।
भारत का यह बयान लिट्टे की ओर से सोमवार को की गई संघर्षविराम की अपील के एक दिन बाद आया है। श्रीलंका सरकार ने इस अपील को तत्काल ठुकरा दिया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने एक बयान में कहा कि भारत ने श्रीलंका सरकार और सभी संबद्ध पक्षों से अपील की है कि वे बेघर हुए नागरिको को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए उचित और विश्वसनीय प्रक्रिया अपनाए। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को इस पर नजर रखने दिया जाए। उन्होंने कहा सुरक्षित क्षेत्र की शुचिता का दोनों पक्षों द्वारा पालन किया जाना चाहिए।
अशांत क्षेत्रों से कुछ घायलों को समुद्र के रास्ते बाहर निकाले जाने की ओर संकेत करते हुए भारत ने दोनों पक्षों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में ऐसे लोगों को समुद्री या जमीनी रास्ते से बाहर निकालने की अपील की है।
प्रवक्ता ने कहा भारत मासूम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर प्रकार की सहायता देने और राहत सामग्री, दवाइयों और चिकित्सा संबंधी देखभाल की जरूरते पूरी करने को राजी है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार बीमार और घायल लोगों को चिकित्सा सहायता तथा दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए श्रीलंका सरकार के साथ बातचीत कर रही है।
विदेश सचिव शिवशंकर मेनन की अगले सप्ताह होने वाली श्रीलंका यात्रा में बातचीत के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का मसला छाए रहने की संभावना है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया िक घरेलू जिम्मेदारियां बढ़ जाने की वजह से विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी सार्क देशों के मंत्रियों की 31 वीं बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications