'संघर्ष विराम को तैयार' तमिल विद्रोही

तमिल विद्रोही ( एलटीटीई) संघर्षविराम के लिए तैयार है लेकिन बातचीत से पहले हथियार डालने की सरकार की शर्त को वो मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं.
सेना के प्रवक्ता का कहना है कि अगर विद्रोही चाहते हैं कि बातचीत हो तो उन्हें हर हाल में हथियार डालने होंगे.
ग़ौरतलब है कि पिछले हफ़्तों में सेना ने तमिल विद्रोहियों को उनके कई ठिकानों से खदेड़ दिया है.
पत्र से प्रस्ताव
तमिल विद्रोहियों के राजनीतिक प्रमुख बालासिंघम नादेसन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पत्र लिख कर संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा है.
ये देख कर बड़ा दुख होता है कि इस विशाल मानवीय त्रासदी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ख़ामोश है विद्रोही नेता बालासिंघम नादेसन
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अपने पत्र में उन्होंने लिखा है, "अभी तक की लड़ाई में दो हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि पाँच हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं."
उनका कहना था, "ये देख कर बड़ा दुख होता है कि इस विशाल मानवीय त्रासदी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ख़ामोश है."
विद्रोही नेता का कहना है कि तमिल लोगों के इन दुर्गति को समाप्त करने के लिए संघर्ष विराम आवश्यक है.
उनका कहना था," एलटीटीई ये कोशिश संघर्ष विराम के लिए कर रहा है, ताकि शांति वार्ता से इस जातीय विवाद का राजनितिक हल निकाला जा सके."
उधर श्रीलंकाई सेना के प्रवक्ता ब्रिगडियर ब्रिगेडियर उदया नानायाक्कारा ने बीबीसी को बताया कि सरकार शर्तों के साथ संघर्ष विराम पर बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी.
उनका कहना है, "उन्हें बातचीत के टेबल पर आने से पहले हर हाल में हथियार डालने होंगे."
पिछले हफ़्तों में श्रीलंकाई सेना ने तमिल विद्रोहियों को उनके गढ़ से बेदखल करने में सफलता मिली है और सेना ने विद्रोहियों को मुलईतिवु के जंगलों में सीमित कर दिया है.
तमिल विद्रोही पिछले 25 साल से तमिल राष्ट्र की माँग के लिए सशस्त्र अभियान चला रहे हैं. इस दौरान विद्रोहियों और सेना के बीच जारी संघर्ष में अब तक क़रीब सत्तर हज़ार लोग मारे गए हैं.


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