ग्वांतानामो बे से ब्रिटेन पहुँचे मोहम्मद

ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड ने कहा है कि ग्वांतानामो को बंद करने की दिशा में ये पहला क़दम है.
बिनयाम मोहम्मद का कहना है कि उन्हें बंदीगृह में प्रताड़ित किया गया. मोहम्मद ने एक बयान में कहा है कि उनकी सबसी कड़वी स्मृति उस समय की है जब उन्हें पता चला कि कथित तौर पर प्रताड़ित करने वालों को ब्रितानी ख़ुफ़िया एजेंटों से जानकारी मिली रही है.
उड़ान के दौरान उनके साथ एक डॉक्टर भी था. डॉक्टर ने कहा कि मोहम्मद मानसिक और शारीरिक तौर पर मीडिया से रूबरू होने के काबिल नहीं है.
मोहम्मद के मुताबिक, "मैने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसे अनुभव से गुज़रना पड़ेगा. इससे पहले प्रताड़ना मेरे लिए अमूर्त शब्द था. मैने कल्पना नहीं की थी कि मैं प्रताड़ना का शिकार बनूँगा. यकीन नहीं हो रहा कि मुझे अगवा किया गया, एक देश से दूसरे देश ले जाया गया और प्रताड़ित किया गया- सब अमरीकी सरकार के कहने पर. मैं इस सब से उबरना चाहता हूँ और इस सब को पीछे छोड़ना चाहता हूँ लेकिन बाक़ी क़ैदियों के प्रति भी मेरी ज़िम्मेदारी है कि उन्हें कोई भूले नहीं."
मोरक्को में कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के बारे में मोहम्मद ने बयान दिया है, "मैं पाकिस्तान में ब्रितानी ख़ुफ़िया अधिकारियों से मिला था. मैने उनसे खुलकर बात की थी, लेकिन मुझे नहीं पता था कि जिनसे मैं मदद की उम्मीद लगाए बैठे था वही मेरे ख़िलाफ़ हो जाएँगे. सच बाहर आना चाहिए ताकि दोबारा ऐसा किसी के साथ न हो."
वहीं ब्रितानी विदेश मंत्री ने कहा है कि मोहम्मद की रिहाई कई वर्षों की मेहनत का नतीजा है.
ब्रिटेन के एटॉर्नी जनरल इस मुद्दे पर विचार विमर्श कर रहे हैं कि प्रताड़ना के आरोप की आपराधिक जाँच करवाई जाए या नहीं.
पुलिस का कहना है कि बिनयाम मोहम्मद को लंदन में केवल हिरासत में लिया गया है उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है. वे पंद्रह वर्ष की उम्र से ब्रिटेन में रह रहे हैं और उन्हें 2002 में पाकिस्तान से पकड़ा गया था.
उनके वकीलों का कहना है कि ब्रिटेन को उनसे कोई ख़तरा नहीं है.


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