ब्रिटेन में आप्रवासियों के लिए नियम कड़े

ब्रितानी गृह मंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि सरकार को ये सुनिश्चित करना होगा कि आर्थिक संकट को देखते हुए ही वो इस मामले में अपनी नीति बनाए.
भारत से भी हर साल बड़ी संख्या में लोग ब्रिटेन में आकर नौकरी करने आते हैं.
पिछले साल करीब 38 लाख ग़ैर ब्रितानी लोग वहाँ काम कर रहे थे. ब्रिटेन में यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले लोगों को विभिन्न श्रेणियों में रखा जाता है.
ये श्रेणियाँ अंक-प्रणाली पर आधारित होती हैं जिसकी बिनाह पर तय होता है कि इन लोगों को ब्रिटेन में काम मिलेगा या नहीं.यूरोपीय संघ के नागरिकों पर ऐसी कोई बंदिश नहीं है.
अप्रैल के बाद से अब यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले लोगों के पास ब्रिटेन में नौकरी पाने के लिए मास्टर्स डिग्री होनी चाहिए और कम से कम 20 हज़ार पाउंड होने चाहिए.
ब्रितानी गृह मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक इस क़दम के बाद ऐसे आप्रवासियों की संख्या 26 हज़ार से घटकर 14 हज़ार हो जाएगी.
गृह मंत्री ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में हुनरमंद लोगों की कमी है वहाँ ब्रितानी लोगों को प्रशिक्षित करने पर विचार किया जाएगा.
ब्रिटेन में बेरोज़गार लोगों की संख्या 20 लाख के क़रीब पहुँच गई है जो 12 वर्षों का सबसे ऊँचा आंकड़ा है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले तीन महीनों में देश में लगभग डेढ़ लाख लोग बेरोज़गार हुए हैं.


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