इस वर्ष असल उद्देश्य को भुलाकर दिया गया अशोक चक्र : जनरल मलिक

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। एक सेवानिवृत्त जनरल सहित सेना के कई पूर्व आला अधिकारियों का मानना है कि शांतिकाल में पराक्रम के लिए दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान-अशोक चक्र इस वर्ष भावनात्मक आधार पर दिया गया है और इसे देने में वह मूल आधार भुला दिया गया जिसे लेकर इस अलंकरण की स्थापना हुई थी।

अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष जिन लोगों को अशोक चक्र से अलंकृत किया गया, उनमें से अधिकांश ने मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के दौरान कोई वीरतापूर्वक कार्य नहीं किया था। अधिकारियों के मुताबिक उन्हें इस अलंकरण से सिर्फ इसलिए नवाजा गया क्योंकि उन्होंने देश पर हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के दौरान अपनी जान गंवाई।

इस वर्ष महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, अतिरिक्त आयुक्त अशोक कामटे, इंस्पेक्टर विजय सालस्कर को अशोक चक्र से नवाजा गया है। ये तीनो मुंबई हमले के दौरान शहीद हुए थे। इसके अलावा दिल्ली में बाटला हाउस में मुठभेड़ में शहीद हुए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा सहित कुल 11 लोगों को अशोक चक्र से नवाजा गया है।

जनरल (सेवानिवृत्त) वी.पी. मलिक ने आईएएनएस से कहा, "अशोक चक्र की शुरुआत एक ऐसे सम्मान के रूप में की गई थी, जो शांतिकाल में सर्वोच्च शौर्य और पराक्रम दिखाने के लिए दिया जाता है। दुख की बात यह है कि इस साल जिन लोगों को यह सम्मान दिया गया, उनमें से अधिकांश आतंकवादियों की गोलियों की बौछार के रास्ते में आने के कारण शहीद हुए हैं।"

मलिक ने बताया कि काबुल स्थिति भारतीय उच्चायोग में हुए बम धमाके में मारे गए ब्रिगेडियर आर.डी. मेहता को शौर्य चक्र से अलंकृत करना भी युक्तिसंगत नहीं है।

एक अन्य अधिकारी मेजर जनरल (सेवा.) अफसर करीम ने कहा, "अशोक चक्र की शुरुआत शांतिकाल में पराक्रम दिखाने वालों के लिए की गई थी, न कि आतंकवादियों की गोलीबारी के बीच जान गंवाने वालों के लिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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