इंसान के पसीने से की जा सकेगी अपराध की जांच
वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां फिंगर प्रिंट्स मौजूद नहीं होते या फिर उन्हें मिटा दिया जाता है उस स्थिति में आतंकवादियों या अपराधियों की तलाश करने में पसीने एक जैव सबूत साबित हो सकते हैं।
इंसान का पसीना एक जैव-रासायकिन यौगिक होता है जिससे हम जो खाना खाते या जो दवा लेते हैं या तक कि हमारी मानसिक स्थिति और लिंग का भी पता लगाया जा सकता है।
टी-शर्ट, जुराब या फिर टेबल पर हाथ रखने से सटे पसीने की जांच से काफी रहस्यों से पर्दा हटाया जा सकता है।
तेल अवीव विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ केमेस्ट्री के माइकल गोजिन ने पसीने में मौजूद प्रोटीन व पेपटाइन जैसे तत्वों की खोज कर रहे हैं। ये तत्व पसीने में काफी लंबे समय तक बने रहते हैं और इसमें दरुगध भी नहीं होता।
वह और उनकी टीम इंसान के पसीने के उस जैव रासायनिक तत्व की खोज कर रहे हैं जिसे एक नए पहचान चिन्ह के रूप में विकसित किया जा सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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