पूर्व सैनिकों ने मेडल वापस किए

मेडल वापस करने वालों में जवानों से लेकर जनरल रैंक के अधिकारी शामिल हैं.
इससे पहले आठ फ़रवरी को भी पूर्व सैनिकों के एक समूह ने इसी मुद्दे पर अपने मेडल वापस कर दिए थे.
पूर्व सैनिकों के संघ के उपाध्यक्ष मेजर जनरल (रिटायर्ड) सतबीर सिंह का कहना था, "दूसरी बार ऐसा हो रहा है कि घोर निराशा में हम मेडल लौटा रहे हैं. राष्ट्रपति ने हमसे मिलने से इनकार कर दिया है लेकिन उनका एक स्टाफ़ ये मेडल ले जाएगा."
उन्होंने कहा कि देश में पूर्व और मौजूदा सैनिकों की कुल संख्या और उनके परिवार के सदस्यों की गिनती करें तो ये एक बड़ा वोट बैंक साबित होगा.
पूर्व सैनिक संघ ने कहा है कि अगर उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे चुनाव लड़ सकते हैं.
मेजर जनरल (रिटायर्ड) बावा सिंह का कहना था, "जवानों को कुछ भी नहीं मिला है. वे 15-17 वर्षों तक विषम परिस्थितयों में देश की सेवा करते हुए अपने जीवन का अहम हिस्सा बिता देते हैं."
एक और पूर्व सैनिक का कहना था, "तीन युद्ध लड़ने के बाद मुझे क्या मिल रहा है. मैं तीन हज़ार रूपए पेंशन पाता हूँ. मैंने देश के लिए इतना किया अब मुझे कोई देख नहीं रहा है. इसलिए मैंने मेडल लौटाने का फ़ैसला किया."


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