बेटा 10 वर्षो से विधायक, पिता को मालूम ही नहीं..
रायपुर, 21 फरवरी (आईएएनएस)। कवासी लक्ष्मा पिछले 10 वर्षो से छत्तीसगढ़ के विधायक हैं लेकिन उनके 90 वर्षीय पिता इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं और उनका मानना है कि बेटा लक्ष्मा एक दिन गांव लौटेगा और खेतों में हल चलाएगा।
कांग्रेस विधायक लक्ष्मा ने कहा, "दंतेवाड़ा जिले में स्थित मेरा गांव नागारस देश के सर्वाधिक गरीब गांवों में से एक है। नक्सलियों ने गांव के लोगों को समाज की मुख्यधारा से काट रखा है। सन 1998 में विधायक बनने के बाद मैं अपने गांव के उन गिनेचुने लोगों में से हूं जो साफ कपड़े पहनते हैं। मेरे पिता सोचते हैं कि मैं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हूं और वहीं से अच्छी चीजें खरीदने के लिए धन पाता हूं।"
गत नवम्बर में तीसरी बार विधायक चुने गए गोंड जनजाति के लक्ष्मा ने बताया, "मेरे पिता अपने रिश्तेदारों से मुलाकात करके मुझ पर दबाव बनाने के लिए कहते रहते हैं ताकि मैं वापस खेती और तेंदूपत्ता तोड़ने के अपने पुश्तैनी काम में लग सकूं।"
लक्ष्मा ने बताया कि उनके परिवार में किसी ने स्कूली शिक्षा नहीं ली है और गांव में अब जाकर कुछ बच्चों ने स्कूल का मुंह देखा है।
लक्ष्मा याद करते हैं, " जब मैं 1998 में विधानसभा चुनाव लड़ रहा था तब मैंने अपने पिता से मतदान करने के लिए कहा। उनके वापस आने पर मैंने पूछा कि उन्होंने किस पार्टी को वोट दिया? इस पर पिता ने कहा कि उन्हें एक पूंगर (कमल का फूल जो भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न् है) दिखा जो अच्छा लग रहा था, इसलिए उन्होंने उसी पर मतदान किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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