लगभग 5 लाख नौकरियां खत्म, वास्तविक संख्या इससे भी अधिक ! (राउंडअप)
श्रम मंत्रालय द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने लोकसभा को बताया कि इन क्षेत्रों में सितंबर महीने में नौकरियों की कुल संख्या एक करोड़ 62 लाख थी, जो दिसंबर महीने में घट कर एक करोड़ 57 लाख पर आ गई।
मंत्री के अनुसार इस अध्ययन में खदान, धातु, जेम्स व ज्वेलरी, कपड़ा, आटोमोबाइल, परिवहन व सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।
श्रम मंत्री आस्कर फर्नाडीज ने भी बुधवार को इसी अध्ययन का हवाला दिया था। फर्नाडीज ने कहा था कि इस दौरान औसत आमदनी में भी 3.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
यद्यपि फर्नाडीज ने कहा कि सरकार ने छंटनी के संबंध में कोई अध्ययन नहीं करवाया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा देश में या उद्योगों में समाप्त नौकरियों का वास्तविक आंकड़ा नहीं प्रस्तुत करते।
फर्नाडीज ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि लेबर ब्यूरो द्वारा किया गया यह एक नमूना सर्वेक्षण है। यह पूरे देश की रिपोर्ट नहीं है। यह देश में समाप्त हुई कुल नौकरियों की संख्या को नहीं प्रदर्शित करती।"
ज्ञात हो कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के गुरुदास दासगुप्ता तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के रूपचंद पाल व संतश्री चटर्जी ने सदन में यह दावा करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया कि देश में कोई 20 लाख नौकरियां समाप्त हो गई हैं।
नौकरियों में कटौती का यह मुद्दा राजधानी में शुक्रवार को आयोजित 42वें भारतीय श्रम सम्मेलन में भी छाया रहा।
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत की जनता से आर्थिक संकट की पीड़ा को मिल कर साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की नौकरियां बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, भले ही इसके लिए वेतन में कुछ कटौती करनी पड़े।
मुखर्जी ने कहा, "वर्तमान संकट से निपटने के लिए सरकार की सम्मिलित विकास की रणनीति महत्वपूर्ण है।"
वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे मुखर्जी ने कहा "सरकार लगातार गहराते संकट को लेकर सतर्क है और वह भरसक कोशिश कर रही है कि भारतीय समाज पर इसका कम से कम असर पड़े।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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