हाईकोर्ट में वकीलों और पुलिस में झड़प

राज्य सरकार ने हिंसा की जाँच के निर्देश दिए हैं.
गुरुवार को स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर हमला करने वाले वकीलों को पकड़ने के लिए पुलिस हाईकोर्ट परिसर में पहुँची.
सुब्रमण्यम स्वामी पर मंगलवार को उस समय वकीलों ने हमला कर दिया था जब वो हाई कोर्ट में किसी मामले की पैरवी कर रहे थे.
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे वकील सुब्रमण्यम स्वामी के उस बयान से नाराज़ थे जिसमें उन्होंने एलटीटीई का विरोध किया था.
वकील पिछले कई दिनों से श्रीलंका के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं और शहर में प्रदर्शन कर रहे हैं. उनमें से कुछ ने एलटीटीई के समर्थन में नारे भी लगाए पुलिस अधिकारी
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चेन्नई में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी संवाददाता को बताया, "जैसे ही पुलिस हाईकोर्ट परिसर में पहुँची, वकीलों के एक गुट ने पत्थर फेंकना शुरु कर दिया. वहीं पास की एक पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया गया. इसके बाद मज़बूर होकर हमें कार्रवाई करनी पड़ी."
उनका कहना था, "वकील पिछले कई दिनों से श्रीलंका के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं और शहर में प्रदर्शन कर रहे हैं. उनमें से कुछ ने एलटीटीई के समर्थन में नारे भी लगाए."
पुलिस के लाठीचार्ज में लगभग बीस वकील घायल हो गए. पुलिस और वकीलों के बीच झड़प में हाई कोर्ट में जारी तनाव को ख़त्म करने के लिए विशेष तौर पर नियुक्त जज एसी अरुमुगापेरुमल आदित्यन भी घायल हो गए.
सुप्रीम कोर्ट भी नाराज़
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी मद्रास हाई कोर्ट के वकीलों के व्यवहार पर नाराज़गी जताई है.
मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को मद्रास बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को नोटिस जारी किया.
सुप्रीम कोर्ट ने भी वकीलों के व्यवहार पर नाराज़गी जताई
यह नोटिस प्रोफेसर आर मुरलीधरन की याचिका पर जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि हाई कोर्ट के वकील आपराधिक क़ानूनों में बदलाव से लेकर श्रीलंका के तमिलों के मुद्दों को उठा रहे हैं और इस आड़ में अदालती कार्यवाही बाधित हो रही है.
याचिका में ये भी कहा गया है कि इस वर्ष अभी तक वकीलों के विरोध प्रदर्शन के कारण सिर्फ़ नौ दिन ही हाई कोर्ट में कामकाज हो सका.
इस बीच श्रीलंका में जारी लड़ाई का मुद्दा लगातार दूसरे दिन लोकसभा में उठा.
सत्तारुढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के घटक दल पीएमके के नेता एम रामदॉस ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के बयान को वापस लेने की माँग की.
प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में कहा था कि भारत तमिल विद्रोहियों के विरुद्ध लड़ाई ख़त्म करने के लिए श्रीलंका पर दबाव नहीं डाल सकता है.
जबकि रामदॉस का कहना था कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने संबोधन में कहा है कि श्रीलंका सरकार को युद्ध ख़त्म करना चाहिए.


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