आतंकवादियों को नहीं दफनाने के भारतीय मुसलमानों के निर्णय का स्वागत
वाशिंगटन, 19 फरवरी (आईएएनएस)। मुंबई हमलों के दौरान सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में मारे गए नौ आतंकवादियों के शवों को दफनाए जाने से इंकार करने के भारतीय मुसलमानों के फैसले का एक अमेरिकी स्तंभकार ने स्वागत किया है।
अमेरिकी समाचार पत्र में बुधवार को थॉमस एल. फ्राइडमैन ने अपने स्तंभ में लिखा, "यह सही है कि हिंदू बहुल भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं लेकिन वे इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ खड़े हैं।"
आत्मघाती हमलावरों के संबंध में थॉमस ने लिखा है कि इस चलन को रोकने के लिए मुस्लिम समुदाय को ही आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कदमों की खुलकर आलोचना करनी चाहिए।
थॉमस ने इस मुद्दे को भारतीय परिप्रेक्ष्य में जोड़कर लिखा, "भारतीय मुसलमानों ने मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के दौरान मारे गए आतंकवादियों के शवों को दफनाने से इंकार कर साहस का परिचय दिया है। आत्मघाती हमलों को रोकने में यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। वैसे यह सच है कि बदलाव एक रात में नहीं आते हैं लेकिन इस निर्णय से जरूर सहायता मिलेगी।"
थॉमस ने कहा कि भारतीय मुसलमानों के इस फैसले के पीछे लोकतंत्र और बहुलतावादी समाज है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। यही कारण है कि भारतीय मुसलमान अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों से काफी कम जुड़ते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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