ट्रेन में तोड़फोड़ को कला की संज्ञा !

ट्रेन में तोड़फोड़ को कला की संज्ञा!

स्वीडन में आर्ट्स कॉलेज के एक छात्र ने मेट्रो ट्रेन में तोड़फोड़ की और उसे बदरंग करने के बाद इसकी रिकार्डिंग को कला के तौर पर पेश किया है.

हालांकि स्टॉकहोम परिवहन प्राधिकरण ( एसएल) ने आर्ट्स कॉलेज से मुआवज़े की मांग की है. एसएल के चेयरमैन क्रिस्टर वेनरहोम का कहना था कि प्राधिकरण मुआवज़े के तौर पर 11,500 डॉलर की राशि चाहता है.

ट्रेन में तोड़फोड़ की घटना अजीबोगरीब ढंग से हुई. मेट्रो में बैठे यात्रियों के बीच एक मुखौटाधारी व्यक्ति आया जिसके बाद उसने डिब्बे के अंदर ग्राफिती बनाना शुरु किया.

ग्राफिती बनाने के बाद मुखौटाधारी व्यक्ति ने ट्रेन का शीशा तोड़ दिया और टूटे हिस्से से कूद कर ट्रेन से बाहर निकल गया. इस पूरे वाकये को वीडियो कैमरे पर क़ैद किया गया और इसे यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ आर्ट्स, क्राफ्ट्स एंड डिज़ाइन के छात्र मैग्नग्स नुगटाफ्स ने अपनी एमफिल थीसिस के तौर पर पेश किया.

यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर इस छात्र ने लिखा है कि वो ग्राफ़िती और अपने निजी अनुभवों को नई मीडिया तकनीकों से जोड़कर पेश करना चाहते थे और वो भी ग्राफ़ीती के पारंपरिक स्वरुप को तोड़े बिना.

यूनिवर्सिटी का कहना है कि वो छात्रों को क़ानून तोड़ने की अनुमति नहीं देता है. हालांकि यूनिवर्सिटी के अनुसार अभी ये साफ़ नहीं है कि छात्र ने इस पूरे प्रकरण को केवल फ़िल्माया है या फिर वो इस तोड़फोड़ में शामिल था.

स्वीडन के सांस्कृतिक मामलों की मंत्री लीना एडेलसॉन लिजेरॉथ ने यह रिकार्डिंग देखने के बाद इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और कहा है कि तोड़फोड़ को कला की संज्ञा नहीं दी जा सकती है.

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