'एशिया में 2.3 करोड़ नौकरियाँ जा सकती हैं'

इस रिपोर्ट के अनुसार भारत समेत एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में इस साल लगभग पाँच करोड़ नई नौकरियाँ पैदा करने की ज़रूरत होगी.
ये आंकड़े मनीला में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की उस रिपोर्ट में जारी किए गए हैं जिसमें वैश्विक वित्तीय संकट का एशिया क्षेत्र पर प्रभाव आंका गया है.
'शहर से गांव वापस'
समाचार एजेंसियों के अनुसार आईएलओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में श्रमिकों की तेज़ी से बढ़ रही संख्या के लिए इस साल भारत में लगभग दो करोड़, चीन में लगभग 1.1 करोड़ और इंडोनेशिया में लगभग 36 लाख नौकरियों की ज़रूरत होगी.
इसका असर एशिया की औद्योगिक तौर पर मज़बूत और विकासशील, दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं पर महसूस हो रहा है. भारत से लेकर चीन और वियतनाम तक, देश के ही भीतर रोज़गार के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले अनेक लोगों में ग्रामीण क्षेत्र में वापस जाकर नौकरी की तलाश का रुझान देखा जा रहा है आईएलओ की क्षेत्रीय निदेशक
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इस रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय संकट के कारण इन परिस्थितियों में लोगों का ग्रामीण से शहरी इलाक़ों में जाना घटेगा और कई लोग कम वेतन वाले कृषि क्षेत्र में लौटने को मजबूर होंगे. आईएलओ के अनुसार इसका मुख्य कारण कारखानों में लोगों की छंटनी होगा.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की क्षेत्रीय निदेशक साचिको यामामोटो के अनुसार इस स्थिति में बेरोज़गारी और समाजिक संकट पैदा होने की संभावना है.
ग्यारह देशों के प्रतिनिधियों की मनीला में चल रही बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "इसका असर एशिया की औद्योगिक तौर पर मज़बूत और विकासशील, दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं पर महसूस हो रहा है."
उनका कहना था, "भारत से लेकर चीन और वियतनाम तक, बड़ी संख्या में देश के ही भीतर रोज़गार के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले लोगों में ग्रामीण क्षेत्र में वापस जाकर नौकरी की तलाश का रुझान देखा जा रहा है."
उनका कहना था कि एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का विकास रोज़गार-रहित विकास कहा जाता है, इसलिए सरकारों को अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहन पैकेज देकर उनमें जान फूँकनी होगी ताकि नौकरियाँ बचाई जा सकें और नई नौकरियाँ पैदा की जा सकें.


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