भारत ने लिट्टे से हथियार छोड़ने को कहा, तमिल सांसदों ने जताया आक्रोश (लीड-2)
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ संघर्ष में मारे जा रहे आम लोगों के प्रति 'दुख व पीड़ा' जाहिर करते हुए विदेश मंत्री प्रणब मुखजी ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि निर्दोष तमिलों की रक्षा व सुरक्षा के लिए भारत हर संभव कदम उठाने को वचनबद्ध है।
मुखर्जी ने साथ ही स्पष्ट किया कि नई दिल्ली संघर्ष खत्म कराना चाहता है लेकिन वह एक संप्रभु राष्ट्र को उसके अपने मामले से निपटने के लिए निर्देश नहीं दे सकता।
मुखर्जी के बयान से असंतुष्ट एमडीएमके और पीएमके के सांसदों ने सरकार पर श्रीलंकाई सत्ता की भाषा बोलने और आम नागरिकों की हत्या के लिए कोलंबो को हथियार और विस्फोटक मुहैया कराने का आरोप लगाया।
लिट्टे और सेना के बीच जारी संघर्ष में आम लोगों के पीड़ित होने की आ रही खबरों के दबाव में मुखर्जी ने कहा कि भारत श्रीलंका के युद्धग्रस्त उत्तरपूर्वी क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए तैयार है।
तमिल सांसदों के 'स्टॉप वार' के नारे के बीच मुखर्जी ने कहा, "यह संघर्ष संभवत: सैन्य कार्रवाई का अंतिम चरण हो सकता है, ऐसे में लिट्टे के लिए बेहतर यही होगा कि वह सभी नागरिकों को छोड़ दे और हथियार त्याग दे।"
एक महत्वपूर्ण बयान में मुखर्जी ने लिट्टे पर आरोप लगाया कि उसने तमिल समुदाय का भारी नुकसान किया है।
मुखर्जी ने कहा कि भारत सरकार श्रीलंका की सरकार और रेड क्रास के साथ युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे आम लोगों को निकालने में सहयोग करने के लिए तैयार है।
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सेना पर आम नागरिकों पर गोली चलाने और लिट्टे पर उन्हें कब्जे में रखने आरोप लगाया है, लेकिन दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
मुखर्जी ने कहा कि युद्धक्षेत्र में फंसे आम नागरिकों को लिट्टे युद्ध कवच के रूप में इस्तेमाल कर रहा है जो चिंतनीय है।
मुखर्जी ने श्रीलंका से तमिल बहुल उत्तरी और बहु नस्लीय पूर्वी इलाके में सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के संविधान में किए गए 13वें संशोधन को लागू करना इस दिशा में अहम है।
इस मुद्दे पर संसद में काले कपड़े पहन कर विरोध कर रहे सांसद सरकार से श्रीलंका में संघर्ष विराम घोषित करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे थे।
इस बारे में मुखर्जी ने कहा, "भारत सरकार के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिसके तहत वह एक संप्रभु राष्ट्र को विशेष कदम उठाने के लिए कहे। यह संभव नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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