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कंबोडिया में शुरु हुआ ऐतिहासिक मुक़दमा

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कंबोडिया में शुरु हुआ ऐतिहासिक मुक़दमा

पाँच पूर्व नेताओं पर जो मुक़दमे चलने हैं उनमें से कॉमरेड डॉएक पहले नेता हैं जिनके विरुद्ध मामला शुरू हुआ है.

इन मुक़दमों में जिन आरोपों पर सुनवाई होनी है वो उन घटनाओं से संबंधित हैं जो 30 वर्ष पहले हुई थीं.

उनमें प्रताड़ना, बलात्कार और व्यापक पैमाने पर हत्याओं के मामले शामिल हैं. जिन लोगों पर इन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं वे अब वृद्धावस्था में पहुँच गए हैं.

बहुत से कंबोडियाई नागरिक ऐसे भी हैं जो उस समय पैदा भी नहीं हुए थे जब ख़मेर रूज का शासन था. लेकिन उन घटनाओं का शिकार होकर जीवित बचने वाले बहुत से लोगों के लिए ये मुक़दमे न्याय का प्रतीक हैं, भले ही येदेर से हो रहा है.

कंबोडिया के न्याय विभाग से संबंधित एक वरिष्ठ पदाधिकारी हेलेन जारविस ने इन मुक़दमों की अहमियत के बारे में कहा, "मुझे नहीं लगता कि हम इस दिन के महत्व को बढ़ाचढ़ाकर बताएँ क्योंकि इसका तो कंबोडिया के इतिहास में वैसे ही बहुत महत्व है. ख़मेर रूज की सत्ता को हटे हुए तीस वर्ष से कुछ ज़्यादा समय हुआ है और यह ऐसा दिन है कि बहुत से लोगों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि वे यह दिन देखने के लिए जीवित रहेंगे. आज हम एक नए रास्ते पर चल रहे हैं."

ख़मेर रूज के एक नेता कॉमरेड डुएक पर युद्धापराधों और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं.

किसी ज़माने में कॉमरेड डुएक गणित के अध्यापक थे लेकिन ख़मेर रूज के शासन के दौरान उन पर बीस हज़ार क़ैदियों को मार देने के आदेश देने के भी आरोप हैं.

इतिहास

कॉमरेड डुएक को ख़मेर रूज के अन्य वरिष्ठ नेताओं से इस तरह भिन्न माना जाता है क्योंकि उन्होंने जो कुछ हुआ उसके लिए अफ़सोस जताया था और माफ़ी भी माँगी थी.

उनके वकील फ्रेंकोइस रॉक्स का कहना था," बचाव पक्ष याद दिलाना चाहता है कि कॉमरेड डुएक नौ वर्ष, नौ महीने और सात दिन तक अस्थाई बंदी रहे हैं. बचाव पक्ष ज़ोर देकर कहता है कि यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है. "

ये मुक़दमे एक तरह से युवा पीढ़ी के लिए भी ऐसा अवसर हैं जिनके ज़रिए वे जान पाएंगे कि तीस साल पहले क्या हुआ था.

युवा पीढ़ी में बहुत से लोगों को औपचारिक शिक्षा में ख़मेर रूज के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हुई है. कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जिन्होंने अपने माता-पिता या बुज़ुर्गों से ख़मेर रूज के बारे में अनौपचारिक रूप से सुना होगा.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 1970 के दशक में ख़मेर रूज के पाँच वर्ष के शासन के दौरान कितने लोग मारे गए थे.

कुछ अनुमानों के अनुसार दस लाख से ज़्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. ख़मेर रूज के नेता पोल पोट ने मार्क्सवादी विचारधारा को अपने ही तौर पर परिभाषित करके शासन किया था.

पोल पोट कंबोडिया को ग्रामीण यूटोपिया बनाना चाहते थे और इसके लिए वे शहरों से तमाम लोगों को गाँवों में बसाना चाहते थे. उस शासन के दौरान धन और निजी संपत्ति रखना बंद था और धर्म की भी इजाज़त नहीं थी. बहुत से लोगों को या तो देश का दुश्मन क़रार दिया गया या फिर अमरीकी जासूस कहकर मार दिया गया. बहुत से लोग बीमारियों और प्रताड़ना की वजह से मौत का शिकार हो गए थे.

ख़मेर रूज को अंततः 1900 उनासी में सत्ता से बेदख़ल कर दिया गया था लेकिन उसने जंगलों से अगले लगभग बीस वर्ष तक लड़ाई जारी रखी, जब तक कि उसके नेता पोल पोट की मृत्यु नहीं हो गई.

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