बेरोजगार हीरा कारीगार लौटे खेत की ओर

अहमदाबाद, 17 फरवरी (आईएएनएस)। मंदी के प्रभाव से बेरोजगार हुए हजारों हीरा कारीगर खेती के पुराने व्यवसाय में लौटे गए हैं और नकदी फसल जीरे की खेती से कुछ ही महीनों में उनके जीवन में फिर से रोशनी वापस आने वाली है।

अहमदाबाद जिले के संगसार के राजेश डाभी ने कहा कि हीरा व्यवसाय में काम करते हुए मैं साल भर में करीब 60,000 रुपये कमाता था। अब अपनी जीरे की फसल से मुझे 16 लाख रुपये की आमदनी की संभावना है।

पांच महीने पहले राजेश भावनगर में हीरा फैक्टरी में काम करता था। पहले एककपास उत्पादक रहे राजेश ने पानी की कमी के चलते खेती में आ रही समस्याओं के कारण कृषि को छोड़ दिया था।

पिछले सात वर्षो में चेक डैम और बड़े तालाबों के निर्माण से भावनगर, आमरेली और पालनपुर में पानी की स्थिति में बहुत सुधार आया है।

राजेश ने आईएएनएस से कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि सरकारी सहायता से बनाए गए चेक डैम और तालाबों की सहायता से मैं अपनी 40 बीघा जमीन में जीरे की खेती कर पाया।"

राजेश ने कहा कि पिछले चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद उनकी फसल अब तैयार है और अगले 15 से 20 दिन के भीतर उनको पैसा मिलेगा।

सूरत के करीब 10 लाख हीरा कामगारों में से 60 प्रतिशत खेती से जुड़े हैं। वर्तमान में करीब 50,000 हीरा कामगार सूरत से अहमदाबाद और भवनगर जिलों में कृषि कार्य में वापस लौट चुके हैं। मार्च-अप्रैल में परीक्षाएं खत्म होने के बाद और 50,000 हीरा कामगारों के वापस गांवों में लौटने की उम्मीद है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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