अंतरिम बजट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

pranab mukherjee
भोपाल, 16 फरवरीः विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा सोमवार को पेश किए गए अंतरिम बजट पर मिलाजुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जहां एक ओर कांग्रेस इसे ऐतिहासिक करार दे रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी दलों का कहना है कि बजट उन मुख्य समस्याओं का हल तलाशने में विफल रहा है जिनसे भारत इस समय जूझ रहा है।

राज्य कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मानक अग्रवाल ने अंतरिम बजट को ऐतिहासिक करार दिया है। उनका कहना है कि यह किसानों को राहत देने के साथ ही विकासोन्मुखी है और इसमें हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है।

दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश मंत्री रामेश्वर शर्मा ने अंतरिम बजट को यूपीए सरकार का 'अंतिम बजट' करार दिया है। उनका कहना है कि वर्तमान केन्द्र सरकार की नीतियों ने कुछ लोगों को भले ही लाभ पहुंचाया हो मगर अधिकांश लोगों का पेट और हाथ अब भी खाली है।

उन्होंने कहा, "आयकर देने वालों की संख्या और विकास में कोई संबंध नहीं है। यही वजह है कि आयकर देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन आमजन के जीवन में कोई सुधार नहीं आया है।

सरकार है कि आयकर देने वालों की संख्या को विकास बताने में जुटी है। आदिवासी और गरीब लोगों के हालात नहीं बदले है। अंतरिम बजट में नया कुछ नहीं है सरकार ने सिर्फ पुराना पाठ ही सुनाया है जो वास्तविकता के धरातल पर कोई असर नहीं दिखा पाया है।"

माकपा के प्रदेश सचिव बादल सरोज ने भी अंतरिम बजट को चुनावी बजट कहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सबसे बड़ा संकट मंदी है।

सरकार उद्योगपतियों के लिए तो बेल आउट पैकेज दे रही है मगर उसे आम आदमी तथा कर्मचारी वर्ग की कोई चिन्ता नहीं है। सरोज ने कहा कि यही कारण है कि अंतरिम बजट में आम आदमी और कर्मचारी की कोई बात नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि अब तक देश में मंदी के कारण 10 लाख लोग नौकरियां गवां चुके हैं और चुनाव तक एक करोड़ कर्मचारी नौकरी से हटा दिए जाएंगे।

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