भारी घाटे वाले अंतरिम बजट में सामाजिक क्षेत्र पर जोर (राउंडअप)

मुखर्जी द्वारा पेश 9,52,231 करोड़ रुपये के अंतरिम बजट में सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं पर खर्च में भारी बढ़ोतरी की गई है। लेकिन यहीं पर कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने और समाज के कमजोर वर्गो को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बजट में कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की गई है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में 69 मिनट के अपने अंतरिम बजट भाषण में मुखर्जी ने ज्यादातर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की उपलब्धियां ही गिनाई। उन्होंने कहा कि नई सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले नियमित बजट में अतिरिक्त कदम उठाए जाने की जरूरत होगी।

मुखर्जी ने यह स्पष्ट किया कि देश की विकास की गाड़ी सही दिशा और सही रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव को बेअसर करने में सक्षम साबित हो रहे हैं।

मुखर्जी ने अगली सरकार द्वारा सदन में नियमित बजट पेश किए जाने तथा उसे पास किए जाने तक सरकारी खर्च के लिए लेखानुदान मांगे पेश की।

मुखर्जी ने कहा, "असाधारण आर्थिक परिदृश्य असाधारण कदमों की मांग करते हैं। अभी ऐसे ही कदमों की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "यह कठिन समय है, जब अधिकतर अर्थव्यवस्थाएं अपने को स्थिर बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 7.1 फीसदी होने से देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है।"

मुखर्जी ने साफ कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, उच्च शिक्षा और स्कूली छात्रों के लिए मिड डे मील योजना जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च बढ़ाने के कारण वित्तीय घाटा बढ़कर 5.5 फीसदी हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि फरवरी 2006 में आरंभ की गई राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना देश के 100 जिलों में क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2009-10 में इस योजना के लिए 30,100 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया है।

मुखर्जी ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा सुलभ कराने और इसके ढांचागत विकास में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत 2009-10 के लिए 13,100 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही स्कूलों में मध्याह्न् भोजन के लिए वर्ष 2009-10 में 8,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव है।

मुखर्जी ने कहा कि युवा कार्य व खेल मंत्रालय तथा संस्कृति मंत्रालय के लिए वर्धित आयोजना आवंटनों का प्रावधान किया गया है, ताकि अगले वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए पर्याप्त संसासधन सुलभ हो सकें।

मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में वित्तीय घाटा बढ़कर छह फीसदी हो जाएगा, जबकि अनुमान 2.5 फीसदी का लगाया गया था। इसी तरह राजस्व घाटा अनुमानित एक फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी हो जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बजट अनुमान की तुलना में कर संग्रह में भी भारी कमी की आशा है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के इस दौर में राजस्व संग्रह में कमी को देखते हुए योजनागत खर्च में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से वित्तीय घाटा बढ़ेगा।

वैसे यह अंतरिम बजट नई योजनाओं से खाली नहीं है। मुखर्जी ने 18 से 40 वर्ष की विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी विकलांगता पेंशन योजना की घोषणा की।

मुखर्जी ने कहा कि विकसित देश जिस स्तर पर आर्थिक संकट की मार झेल रहे हैं उसका असर दुनिया के अन्य देशों पर पड़ना लाजमी है। इसी कारण उभरते बाजारों में मंदी देखी जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत भी इससे प्रभावित हुआ है। वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में निर्यात में 17.1 फीसदी की गिरावट आई है जबकि औद्योगिक उत्पादन में दिसंबर 2008 में दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

अंतरिम बजट पेश करने के तुरंत बाद मुखर्जी से जब यह पूछा गया कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए उन्होंने क्यों नहीं करों में परिवर्तन जैसे कदम उठाए तो उन्होंने कहा कि अंतरिम बजट की प्रकृति ने उन्हें रोका।

उन्होंने कहा, "इसलिए मैंने कहा कि नियमित बजट में इन चिंताओं को दूर करने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने शानदार काम किया है और हमें लोक-लुभावन बजट की जरूरत नहीं है। हमने अंतरिम बजट की संवैधानिक मर्यादा का ध्यान रखा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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