अफजल गुरु की फांसी की सजा को लेकर भाजपा सांसद का राष्ट्रपति को पत्र
झा ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को लिखे एक पत्र कहा है कि देश के नौजवान केवल मामूली वेतन के लिए सेना में शामिल नहीं होते हैं। वे अपने जीवन को देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए समर्पित करते हैं। सैनिक अपने देश की पवित्र भूमि के एक-एक इंच के लिए लड़ते हैं और देश पर अपने प्राण बलिदान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
झा ने अपने पत्र में कहा कि दो घटनाओं से देश की जनता की आस्था और भावनाओं को आघात लगा है। इनमें से एक संसद भवन पर हमले के लिए सर्वोच्च न्यायालय से दोषी करार दिए गए और फांसी की सजा पाए अफजल गुरु को बचाने की सरकार की कोशिश है।
झा ने अपने पत्र में कहा कि सरकार के इस कदम से कई प्रश्न पैदा हो गए हैं। क्या सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को मानने के लिए बाध्य नहीं है? क्या कार्यपालिका न्यायपालिका से ऊपर है? झा ने संविधान और जनता के अधिकारों के संरक्षक के नाते झा ने राष्ट्रपति इस मामले ध्यान देने का आग्रह किया।
झा ने अपने पत्र में हाल में ही भूतपूर्व सैनिकों द्वारा अपने पदक लौटाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति से पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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