अंतरिम बजट : उत्तर प्रदेश में लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के प्रोफेसर सुकुमार नंदी ने कहा कि अंतरिम बजट से हमें ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। सरकार ने ग्रामीण और कृषि विकास पर ध्यान दिया है जो स्वागत योग्य है। उच्च शिक्षा, सर्व शिक्षा अभियान तथा स्वास्थ्य मिशन की तरफ भी सरकार ने जोर दिया है लेकिन सरकार को दूसरे क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए था।

मल्टीप्लेक्स आई-नोक्स की मैनेजर अनुराधा मुंजाल ने कहा कि अंतरिम बजट में लोगों को उम्मीद थी कि सरकार आयकर में और अधिक छूट देने के साथ आवास ऋण में छूट देगी मगर लोगों को निराशा हाथ लगी।

गोमतीनगर की गृहिणी रचना गुलाटी ने कहा कि खाद्य पदार्थो की कीमतें आसमान पर हैं लेकिन सरकार ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और न ही महंगाई पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया।

एक्सिस बैंक के मैनेजर नवीन कुमार ने माना कि यह अंतरिम बजट था जिसमें सरकार बड़ी राहत का ऐलान नहीं कर सकती थी। ऐसे में सरकार को कम से कम वो सब तो करना चाहिए था जो वो कर सकती थी।

आईआईएम के छात्र मनीष देव कहते हैं रियल स्टेट, आटोमोबाइल, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों की हालत खराब है ऐसे में सरकार एक करोड़ बीस लाख लोगों को रोजगार कहां से देगी। जिस तरह से प्रणब मुखर्जी संप्रग सरकार की पिछले चार साल की उपलब्धियां गिना रहे थे उससे वित्तमंत्री के रूप में उनका भाषण, बजट भाषण कम चुनावी भाषण अधिक लग रहा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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