अंतरिम बजट : लोकसभा में पेश अंतरिम बजट के मुख्य बिंदु (लीड-5)

-वर्ष 2009-10 के लिए योजनागत खर्च 953,231करोड़ रुपये तय।

-वर्ष 2009-10 के बजटीय सहायता 2,85,149 करोड़ रुपये यानी 17.16 फीसदी की गई।

-अतिरिक्त योजनागत खर्च 0.5 फीसदी से 1 फीसदी के बीच हो सकता है।

-वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए वित्तीय घाटा 5.5 प्रतिशत अनुमानित।

-खाद्यान्न, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी 95,579 करोड़ रुपये।

-रक्षा खर्च आवंटन बढ़ाकर 141,703 करोड़ रुपये किया गया।

-ग्रामीण नवीनीकरण खर्च के लिए 11,842 करोड़ रुपये।

-वर्ष 2009-10 में अनुमानित सकल बाजार उधार 3,62,000 करोड़ रुपये रहेगा।

- वर्ष 2009-10 में सकल बजटीय सहायता 285,000 करोड़ रुपये।

-वर्ष 2008-09 में करों में कटौती के कारण करीब 40,000 करोड़ की पर्याप्त राहत।

-वर्ष 2009-10 में ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए 30,100 करोड़ आवंटित।

-ग्रामीण स्वच्छता के लिए 1,200 करोड़ रुपये।

-राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 12,070 करोड़ रुपये।

-ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत विकास के लिए 14,000 करोड़ रुपये।

-मिड डे मील योजना के लिए 8,000 करोड़ रुपये।

-कर संग्रह घटकर 627,949 करोड़ रुपये रहने का अनुमान।

-18-40 वर्ष की विधवाओं के लिए नई योजना की घोषणा।

-18-40 वर्ष उम्र के लिए नई विकलांगता पेंशन की घोषणा।

-अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए 15 सूत्रीय योजना।

- सार्वजनिक बैंकों के नॉन परफॉर्मिग एसेट्स (एनपीए) में कमी।

- चार वर्षो में सार्वजनिक बैंकों के एनपीए 7.8 फीसदी से घटाकर 2.3 प्रतिशत होंगे।

-घाटे में चल रही सार्वजनिक इकाईयों की संख्या 73 से घटकर 58 हुई।

-फायदे में चल रही सार्वजनिक इकाईयों की संख्या 143 से बढ़कर 158 हुई।

-भारत आज भी दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था।

-चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 7.1 फीसदी की दर से विकास करने की संभावना।

-आर्थिक विकास का लाभ सभी तक पहुंचाने की जरूरत।

-वित्त वर्ष 2008-09 में सरकार ने 37 आधारभूत परियोजनाओं पर 70 हजार करोड़ खर्च किए।

-निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) के तहत 54 केंद्रीय आधारभूत परियोजनाओं को मंजूरी।

-पीपीपी परियोजनाओं पर कुल 67,700 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान।

-इंडिया इंफ्रास्ट्रक्च र फाइनेंस कंपनी मार्च अंत तक 10 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा करेगी।

-भारत मुद्रास्फीति की समस्या से उबर चुका है, लेकिन संतोषजनक स्थिति नहीं।

-देश का कृषि परिदृश्य उत्साहित करने वाला है।

-कृषि पर विशेष ध्यान।

-कृषि क्षेत्र के लिए पिछले पांच सालों में योजनागत आवंटन में 300 फीसदी की बढ़ोतरी।

-अल्पावधि कृषि ऋण को बढ़ाकर 250,000 करोड़ रुपये किया गया।

-65,300 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ।

- सरकार किसानों को अतिरिक्त सब्सिडी मुहैया करवाती रहेगी।

-ग्रामीण आधारभूत विकास कोष को 5,500 से बढ़ाकर 14,000 करोड़ रुपये किया गया।

-11वीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा क्षेत्र में खर्च में 900 फीसदी की बढ़ोतरी।

-देश में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा।

-रिकार्ड 32.4 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया।

-वैश्विक आर्थिक परिदृश्य उत्साहजनक नहीं।

-असाधारण परिस्थितियों में असाधारण कदमों की आवश्यकता होती है।

-नियमित बजट में अतिरिक्त वित्तीय कदम उठाने की जरूरत।

-वित्तीय क्षेत्र में सुधार तेज करने की जरूरत।

-पिछले तीन वर्षो में देश का विकास औसतन नौ फीसदी की दर से हुआ।

-प्रति व्यक्ति आय में प्रतिवर्ष 4.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

-बजट घाटा 4.5 फीसदी से घटकर 2.7 फीसदी हुआ।

-राजस्व घाटा 3.6 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी हुआ।

-निर्यात में 26.4 फीसदी की वार्षिक वृद्धि हुई।

-विदेश व्यापार 27.3 प्रतिशत से बढ़कर 35.5 फीसदी हुआ।

-सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में कर 9.2 फीसदी से 12.5 फीसदी हुआ।

-कृषि में 3.7 फीसदी की वार्षिक वृद्धि हुई।

-दूरसंचार और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों के लिए केंद्रीय योजना बढ़ाई गई।

-संशोधित राजस्व घाटा जीडीपी के एक प्रतिशत के बजाय 4.4 फीसदी रहा।

-संशोधित वित्तीय घाटा जीडीपी के 2.5 प्रतिशत के बजाय 6 फीसदी रहा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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