भारी घाटे वाले अंतरिम बजट में कर दरें अपरिवर्तित
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में 69 मिनट के अंतरिम बजट भाषण में मुखर्जी ने अधिकांश समय संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की उपलब्धियां गिनाने में बिताया और कहा कि नई सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले नियमित बजट में अतिरिक्त कदम उठाए जाने की जरूरत पड़ेगी।
मुखर्जी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि देश की विकास की गाड़ी सही दिशा और रफ्तार से चल रही है और उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदम अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव को बेअसर करने में सक्षम साबित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, "यह कठिन समय है, जब अधिकतर अर्थव्यवस्थाएं यथास्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है ऐसे में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 7.1 फीसदी होने से देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है।"
सदन में नियमित बजट पेश होने और उसके पास होने तक सरकारी खर्च के लिए लेखानुदान मांगे पेश करते हुए मुखर्जी ने कहा, "असाधारण आर्थिक परिदृश्य असाधारण कदमों की मांग करते हैं। अभी ऐसे ही कदमों की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्रों जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, उच्च शिक्षा और स्कूली छात्रों के लिए मिड डे मील योजना पर खर्च बढ़ाने के परिणाम स्वरूप वित्तीय घाटा बढ़कर 5.5 फीसदी हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भी वित्तीय घाटा बढ़कर छह फीसदी हो जाएगा, जबकि अनुमान 2.5 फीसदी का लगाया गया था। इसी तरह राजस्व घाटा अनुमानित एक फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी हो जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बजट अनुमान की तुलना में कर संग्रह में भी भारी कमी की आशा है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के इस दौर में राजस्व संग्रह में कमी को देखते हुए योजनागत खर्च में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से वित्तीय घाटा बढ़ेगा।
वैसे यह अंतरिम बजट नई योजनाओं से खाली नहीं है। मुखर्जी ने 18 से 40 वर्ष की विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी विकलांगता पेंशन योजना की घोषणा की।
मुखर्जी ने कहा कि विकसित देश जिस स्तर पर आर्थिक संकट की मार झेल रहे हैं उसका असर दुनिया के अन्य देशों पर पड़ना लाजमी है। इसी कारण उभरते बाजारों में मंदी देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत भी इससे प्रभावित हुआ है। वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में निर्यात में 17.1 फीसदी की गिरावट आई है जबकि औद्योगिक उत्पादन में दिसंबर 2008 में दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
अंतरिम बजट पेश करने के तुरंत बाद मुखर्जी से जब यह पूछा गया कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए उन्होंने क्यों नहीं करों में परिवर्तन जैसे कदम उठाए तो उन्होंने कहा कि अंतरिम बजट की प्रकृति ने उन्हें रोका।
उन्होंने कहा, "इसलिए मैंने कहा कि नियमित बजट में इन चिंताओं को दूर करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने शानदार काम किया है और हमें लोक-लुभावन बजट की जरूरत नहीं है। हमने अंतरिम बजट की संवैधानिक मर्यादा का ध्यान रखा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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