'एच-1 बी वीज़ा वालों पर रोक अस्थायी'

दरअसल अमरीकी कांग्रेस ने आर्थिक पैकेज पास करते समय यह प्रावधान भी किया था कि जिन कंपनियों को पैकेज मिल रहा है, वे एच-1 बी वीज़ा के तहत विदेशियों को काम पर नहीं रख पाएँगी.
इसका ज़्यादा असर भारत के सूचना तकनीक (आईटी) से जुड़े भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है. लेकिन भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़र्ड का कहना है कि इसे लेकर ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं.
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ये अस्थायी राजनीतिक व्यवस्था है. एच-1 बी वीज़ा क़ायम रहेगा और इसका बड़ी संख्या में इस्तेमाल भी होगा."
प्रावधान
कंपनियों के लिए आर्थिक पैकेज को पास करते समय अमरीकी कांग्रेस ने कहा था कि जिन स्थानीय लोगों को नौकरी से निकाला गया है, उनकी जगह एच-1 बी वीज़ा के तहत आने वालों को न रखा जाए.
मेरा मानना है कि ये अस्थायी राजनीतिक व्यवस्था है. एच-1 बी वीज़ा क़ायम रहेगा और इसका बड़ी संख्या में इस्तेमाल भी होगा डेविड मलफ़र्ड
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डेविड मलफ़र्ड ने कहा कि विधेयक में कुछ बदलाव हुए है और ये देखना होगा कि क्या बदलाव हुए हैं. हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि अमरीकी कांग्रेस ने एच-1 बी वीज़ा के लिए पहले से जो सीमा निर्धारित की है, वो अपनी जगह बरक़रार है.
अमरीका हर साल 65 हज़ार लोगों को एच-1 बी वीज़ा देता है. अंदाज़ा है कि इनमें से 40 से 45 हज़ार लोग भारतीय होते हैं और इनमें से भी ज़्यादातर आईटी प्रोफ़ेशनल होते हैं.
इसी शुक्रवार को अमरीकी कांग्रेस ने आर्थिक पैकेज वाला विधेयक पारित किया है, जिसके तहत पैकेज हासिल करने वाली कंपनियाँ एच-1 बी वीज़ा के तहत लोगों को नहीं बहाल कर पाएँगी.


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