श्रीलंका में ही मौजूद है प्रभाकरण

सरकारी समाचार पत्र 'संडे ऑब्जर्वर' के अनुसार लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) पिछले 25 वर्षो के दौरान सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।
दो आत्मघाती हमलावरों में से एक ने कहा कि प्रभाकरण अभी भी उत्तरी इलाके के वान्नी में है और निर्दोष तमिल नागरिकों को कब्जे में रखे हुए है।
अखबार के अनुसार दोनों आत्मघाती हमलावरों ने सुरक्षा बलों के सामने आश्चर्यजनक खुलासे किए हैं। उनके अनुसार युद्ध के तेज होते ही प्रभाकरण ने अपनी पत्नी और 10 वर्षीय छोटे बेटे को एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था।
प्रभाकरण ने 1976 में लिट्टे की स्थापना की थी। उसने मुल्लैतिवु के घने जंगलों में कई गुफाएं और बंकर बना रखे हैं। इन्हीं स्थानों से उसने भारतीय शांति सेना के खिलाफ 1987 से 90 के दौरान युद्ध का संचालन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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