'ग्लोबल वार्मिंग को कम करके आंका'

प्रोफ़ेसर क्रिस फ़ील्ड ने 2007 में जलवायु परिवर्तन पर अहम रिपोर्ट लिखी थी. उनका कहना है कि भविष्य में तापमान अनुमान से कहीं ज़्यादा होंगे.'
फ़ील्ड का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी यानी अंतर-सरकारीय पैनल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन की दर को कम करके आंका है.
उन्होंने चेतावनी दी कि तापमान में वृद्धि पर्यावरण को पहले की भविष्यवाणी से कहीं अधिक नुक़सान पहुँचा सकती है.
शिकागो में अमरीकी साइंस कांफ़्रेंस को संबोधित करते हुए प्रोफ़ेसर फ़ील्ड ने कहा कि ताज़ा ऑंकड़ें बताते हैं कि वर्ष 2000-07 के बीच ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के दर में अनुमान से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है.
अनुमान से अधिक
प्रोफ़ेसर फ़ील्ड का कहना था कि वर्ष 2007 की रिपोर्ट में अगली शताब्दी में तापमान में वृद्धि 1.1 से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस रखी गई है लेकिन इस समस्या को कम करके आंका गया है.
उन्होंने कहा कि भारत और चीन में बिजली पैदा करने के लिए कोयले के इस्तेमाल से कार्बन डाइओक्साइड गैस में वृद्धि हूई है.
प्रोफ़ेसर फ़ील्ड का कहना था कि तापमान पर इसका अभी प्रभाव मालूम नहीं है, लेकिन आशंका यही है कि तापमान तेज़ी से बढ़ सकता है और पर्यावरण को नुक़सान होगा.
उनका कहना है कि पृथ्वी के गरम होने से ट्रोपिकल इलाक़ो में जंगल सूख जाएंगे, जिससे नुक़सान और अधिक होगा.
प्रोफ़ेसर फ़ील्ड ने कहा कि 'बग़ैर प्रभावी कार्रवाई' के जलवायु परिवर्तन बड़े पैमाने पर होगा और इससे निपटने बहुत मुश्किल हो जाएगा.


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