भाजपा चुनाव अभियानः अयोध्या नहीं गोरखपुर से

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह को कल गाजियाबाद में प्रजापति समाज की एक रैली को संबोधित करना है पर वे भी पहले यहाँ आयेंगे और यहाँ की रैली में बोलकर वापस लौट जायेंगे. भाजपा महासचिव और पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण जेटली भी रैली में आ रहे हैं.
ये रैली हालाँकि योगी द्वारा समय-समय पर आयोजित ऐसी तमाम रैलियों की ही विस्तारित कड़ी है पर उन रैलियों के मुकाबले बेहद खास है. ये रैली अनौपचारिक रूप से भाजपा के चुनावी अभियान का श्री गणेश तो करेगी ही साथ ही इस बात की स्वीकारोक्ति भी होगी की पार्टी योगी को कम से कम उत्तर पुर्वी उत्तर प्रदेश में अपना सबसे कद्दावर नेता मनाने लगी है.
आपको याद होगा की योगी और भाजपा के रिश्ते बनते-बिगडते रहे हैं.2002 में तो रिश्ते इतने तल्ख़ हो गए थे की भाजपा सांसद रहते हुए भी योगी ने विधानसभा चुनावों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ न केवल अपना प्रत्याशी लड़ाया बल्कि जिताया भी.2007 में भी विधानसभा चुनावों से पहले योगी के रिश्ते डगमगाए थे जिसे ठीक करने के लिए वेंकैया नायडू और गोपीनाथ मुंडे को आना पड़ा था.
पर अब ये पुरानी बात है.योगी की जमीनी ताकत को पार्टी ने पहचान लिया है और यूपी में अपनी बदहाली के चलते उसे ऐसे ताकतवर नेताओं की हैसियत कबूल करनी पद रही है.
योगी ने हिंदुत्व और विकास के आक्रामक अभियान के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश के डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में अपना मजबूत आधार बनाया है. ये योगी की ताकत ही है की पार्टी ने अयोध्या की बजाय इस बार हिंदुत्व के नए केन्द्र गोरखपुर से अपना अभियान शुरू करने का फैसला किया है.


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