कुछ राज्यों में सांध्यकालीन न्यायालयों की स्थापना होगी : बालाकृष्णन

प्रधान न्यायाधीश रविवार को यहां हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय परिसर में कानूनविदों को संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि सांध्यकालीन न्यायालय के शुरू होने से समाज के सेवारत श्रेणी के लोग इन न्यायालयों में अपील कर सकेंगे। उन्होंने कहा अन्य शहरों में इस तरह के और न्यायालय भी आरम्भ किए जाएंगे ताकि सेवारत श्रेणी के लोगों को त्वरित न्यायिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। सांध्यकालीन न्यायालय से लोगों के समय व धन की बचत को सुनिश्चित बनाया जा सकेगा।

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि देश में लगभग 60 हजार न्यायालय हैं, जिनकी संख्या में 10 से 15 प्रतिशत और वृद्घि कर तीव्र न्याय प्रदान करने की प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सकेगा। उन्होंने कानून के विद्यार्थियों को न्यायिक सेवाएं में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि विभिन्न न्यायालयों में न्यायाधीशों के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।

उन्होंने देश की न्याय प्रणाली में समान अनुपात में बजट प्रावधान की आवश्यकता का भी उल्लेख किया, ताकि अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तरह इसका भी विकास हो सके एवं देश की विधि प्रणाली और सुदृढ़ बन सके।

प्रधान न्यायाधीश ने प्रदेश सरकार द्वारा शेट्टी आयोग की रिपोर्ट को लागू करने तथा प्रदेश में न्यायिक प्रणाली को अधिक सुदृढ़ करने में बेहतर सहयोग देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य में राष्ट्रीय विधि कालेज को स्थापित करने में राज्य द्वारा अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए न्यायिक परिसर के निर्माण से न्यायपालिका एवं आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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