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अंतरिम बजट से पहले उम्मीदें प्रबल

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अनुपस्थिति में मुखर्जी द्वारा पेश किया जा रहा यह बजट भले ही अंतरिम होगा लेकिन उद्योग जगत के लोगों का मानना है कि अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए विशेष कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सुरेश तेंदुलकर ने कहा, "मौजूदा परिस्थितियों में कर दरों में कमी किया जाना अपेक्षित है। इससे लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ेगी।"

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए गत वर्ष दिसम्बर से दो प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा कर चुकी है। उद्योग जगत का मानना है कि संकट से निपटने की कोशिश का सरकार के पास यह अंतिम अवसर होगा।

औद्योगिक संगठन 'एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' (एसोचैम) ने अपने बजट पूर्व ज्ञापन में कहा, "उद्योग जगत लंबे समय से कारपोरेट कर में छूट दिए जाने की मांग करता रहा है लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया है।"

औद्योगिक संगठन फिक्की ने भी हाउसिंग कर में छूट को पांच वर्षो के लिए बढ़ाने और इंवेस्टमेंट अलाउंस को दोबारा शुरू करने जैसे उपाय अपनाने की वकालत की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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