विशेषज्ञों ने कसाब की हिरासत की पाक की मांग को बहानेबाजी बताया
फौजदारी मामलों के प्रसिद्ध वकील राम जेठमलानी ने पाकिस्तान के इस इरादे को 'बेतुका और बचकाना' बताया है।
जेठमलानी ने आईएएनएस से कहा कि हम पाकिस्तान और भारत के बीच इस मूर्खतापूर्ण खेल से ऊब चुके हैं। कसाब की हिरासत मांगकर वे क्या संकेत देना चाहते हैं? यह बेतुका है और संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि कसाब को पाकिस्तान के अधिकारियों के हवाले किया गया तो अन्य गवाहों और सबूतों को भी उन्हें सौंपना होगा। यह संभव नहीं है।
फौजदारी मामलों के वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.टी.एस. तुलसी ने कहा कि कसाब ने यहां अपराध किया है और उसके खिलाफ एफआईआर यहां दर्ज है। इसलिए भारतीय अदालतों को उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का प्राथमिक न्यायाधिकार है। उसके पाकिस्तान प्रत्यर्पण का प्रश्न केवल उस पर मुकदमा चलाने और सजा पूरी होने के बाद ही उठ सकता है।
एक अन्य वरिष्ठ वकील ललित भसीन ने कहा कि भारत में कसाब पर मुकदमा चलाने की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। इसलिए कसाब को पाकिस्तान को सौंपने की जरूरत नहीं है।
भसीन ने कहा कि इस प्रकार के सुझाव केवल बहानेबाजी और दुनिया की सहानुभूति हासिल करने का प्रयास है। यह अर्थहीन है और कानून के अनुसार संभव भी नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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