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अच्छा कदम, पाकिस्तान गंभीर है: अमरीका

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अच्छा कदम, पाकिस्तान गंभीर है: अमरीका

पिछले साल नवंबर में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों में कई विदेशी नागरिकों समेत 170 से अधिक लोग मारे गए थे और 300 लोग घायल हो गए थे.

भारत ने पाकिस्तान में मौजूद तत्वों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया था और उसे कुछ दस्तावेज़ सौंपे थे. पहले कुछ आनाकानी के बाद गुरुवार को पाकिस्तान में इस पर अपना जवाब भारत को सौंपा है. पाकिस्तान ने पहली बार ये स्वीकार किया कि हमलों की साज़िश का कुछ हिस्सा उसकी ज़मीन पर ही रचा गया.

'पाकिस्तान गंभीर है'

इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव ख़ासा बढ़ा हुआ है लेकिन कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि पाकिस्तान के इस कदम से तनाव में कमी लाने का वातावरण बन सकता है.

दोनों अमरीका और भारत ने पाकिस्तान से मुंबई हमलों के बारे में साथ देने को कहा था और जो कार्रवाई पाकिस्तान ने की है वह एक अच्छा कदम है अमरीकी विदेश विभाग

दोनों अमरीका और भारत ने पाकिस्तान से मुंबई हमलों के बारे में साथ देने को कहा था और जो कार्रवाई पाकिस्तान ने की है वह एक अच्छा कदम है

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है, "दोनों अमरीका और भारत ने पाकिस्तान से मुंबई हमलों के बारे में साथ देने को कहा था और जो कार्रवाई पाकिस्तान ने की है वह एक अच्छा कदम है."

उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रॉबर्ट वुड्स ने कहा, "ये दिखाता है कि पाकिस्तान उन लोगों तक पहुँचने के लिए गंभीर है जो इन हमलों में शामिल थे या फिर इनके पीछे थे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय बहुत ग़ौर से पाकिस्तान की ओर देख रहा है और सभी पाकिस्तान से न्याय की उम्मीद रखते हैं."

उनका कहना था कि पाकिस्तान का भी फ़ायदा इसी में है कि वह इस जाँच को अंजाम तक पहुँचाए, यानी इस मामले की जड़ तक पहुँचे.

ब्रजेश उपाध्याय के अनुसार इसी संदर्भ में अमरीका के राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग के निदेशक डेनिस ब्लेयर ने प्रतिनिधि सभा को उन ख़तरों के बारे में बताया जिनका अमरीका सामना कर रहा है.

'आर्थिक मंदी से पैदा ख़तरा'

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की चाबी पाकिस्तान के हाथ में है. यदि वह चरमपंथ पर लगाम लगाए तो इससे तनाव घट सकता है अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग के निदेशक

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की चाबी पाकिस्तान के हाथ में है. यदि वह चरमपंथ पर लगाम लगाए तो इससे तनाव घट सकता है

डेनिस ब्लेयर का कहना था, "आर्थिक मंदी के कारण बहुत बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है और कई सरकारें लड़खड़ाती नज़र आ रही हैं. इससे अफ़रा-तफ़री पैदा हो सकती है और कई साझेदार देश अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में नाकाम हो सकते हैं."

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर वित्तीय मंदी का ख़ासा असर पड़ा है और उसके पास विदेशी मुद्रा बहुत ही सीमित है. अमरीका पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की मदद के लिए उसे कर्ज़ देने पर सैद्धांत तौर पर राज़ी हुआ है.

डेनिस ब्लेयर ने ये भी कहा, "पिछले एक-दो साल के मुकाबले अल क़ायदा कमज़ोर हुआ है और इसका कारण कबायली इलाक़ों में हमले और अमरीकी मिसाइल हमले हैं."

उनका ये भी कहना था कि अमरीका को अल क़ायदा का सामना करने के लिए पूरा पाकिस्तानी सहयोग मिला है लेकिन तालेबान के ख़िलाफ़ कारगर कदम उठाने के बारे में ये नहीं कहा जा सकता.

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव पर राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग के निदेशक डेनिस ब्लेयर ने कहा, "तनाव कम करने की चाबी पाकिस्तान के हाथ में है. यदि वह चरमपंथ पर लगाम लगाए तो इससे तनाव कम हो सकता है."

उनका कहना था कि मुंबई हमले के बाद भारत में ये सोच है कि पाकिस्तानी तत्व भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद को घटाने और देश में ख़ून-ख़राबा फैलाने के लिए ऐसा हमले करवा रहे हैं.

डेनिस ब्लेयर का कहना था, "ऐसे हमले भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की नौबत ला सकते हैं क्योंकि भारत में जनता का ख़ासा दबाव है कि सरकार चरमपंथ के ख़िलाफ़ कारगर कदम उठाए."

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