नीलाम होगा महात्मा गांधी का चश्मा

नीलाम होगा महात्मा गांधी का चश्मा

चार और पाँच मार्च को होने वाली नीलामी में महात्मा गांधी की सैंडल और पॉकेट घड़ी भी नीलाम होंगी.

नीलामी का आयोजन करने वालों ने इन तीनों चीज़ो की कीमत 42 हज़ार डॉलर आंकी है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि नीलामी की बोली इससे कहीं अधिक होगी. अनुमान लगाया जा रहा है कि महात्मा गांधी की इन वस्तुओं की नीलामी में दुनिया भर में काफ़ी दिलचस्पी रहेगी.

वर्ष 1910 की पॉकेट घड़ी

गांधीजी ने ये चश्मे उन्हें देते हुए कहा था कि इनसे उन्हें आज़ाद भारत की तस्वीर नज़र आती है नीलामी के आयोजक

गांधीजी ने ये चश्मे उन्हें देते हुए कहा था कि इनसे उन्हें आज़ाद भारत की तस्वीर नज़र आती है

गांधीजी ने ये चश्मे भारतीय सेना के कर्नल एचए दीवान नवाबिन को 1930 के दशक में दिया था जब उन्होंने उनसे प्रेरणा माँगी थी.

एंटिक्वोरम ऑक्शनीर्स के मिशेल हेरपर्न ने कहा, "गांधीजी ने ये चश्मे उन्हें देते हुए कहा था कि इनसे उन्हें आज़ाद भारत की तस्वीर नज़र आती है."

ज़ेनिथ कंपनी की पॉकेट घड़ी वर्ष 1910 में बनी थी और उसे गांधीजी ने अपनी पोती आभा गांधी को दिया था जो कुछ साल उनकी सहायक रहीं.

घड़ी पहने हुए गांधीजी की कई तस्वीरें हैं. इसी के साथ एक कटोरा और प्लेट भी नीलाम होंगे जो उन्होंने अपनी पोती को दिए थे.

सैंडल एक ब्रितानी सैन्य अधिकारी को वर्ष 1931 में दिए गए थे जब वे लंदन में भारत में स्वशासन पर चर्चा के लिए गए थे.

'दुनिया के हीरो'

गांधीजी के जुड़ी हुई सभी वस्तुओं को किसी संघ्रहालय में रखी जानी चाहिए ताकि आम लोग इन्हें देख सकें. ये आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए ताकि वे इनसे प्रेरणा ले सकें गांधी स्मारक निधि के सचिव

गांधीजी के जुड़ी हुई सभी वस्तुओं को किसी संघ्रहालय में रखी जानी चाहिए ताकि आम लोग इन्हें देख सकें. ये आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए ताकि वे इनसे प्रेरणा ले सकें

एंटिक्वोरम ऑक्शनीर्स के मिशेल हेरपर्न ने लंदन के टेलिग्राफ़ अख़बार को बताया, "गांधीजी के पास बहुत कुछ नहीं था. इसीलिए उनकी जो भी चीज़े नीलामी के लिए सामने आती हैं वो ख़ासी बहुमूल्य हैं. वे अपने अहिंसा के सिद्धांत के लिए केवल भारत के ही हीरो नहीं बल्कि पूरे दुनिया के हीरो हैं."

लेकिन भारत में गांधीजी के कई समर्थकों ने उम्मीद जताई है कि जो भी इन वस्तुओं को ख़रीदेगा वह उन्हें सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शनी के लिए रखेगा.

एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में गांधी स्मारक निधि के सचिव रामाचंद्र राही ने कहा, "गांधीजी के जुड़ी हुई सभी वस्तुओं को किसी संघ्रहालय में रखी जानी चाहिए ताकि आम लोग इन्हें देख सकें. ये आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए ताकि वे इनसे प्रेरणा ले सकें."

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