पंधेर और कोली की सजा-ए-मौत पर ज्यादातर न्यायविद एकमत

गाजियाबाद में शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों मोनिन्दर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेन्द्र कोली को 14 वर्षीया रिम्पा हालदार के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई।

इस मामले में पूर्व सोलिसिटर जनरल सोली जे. सोराबजी ने आईएएनएस से कहा, "हालांकि मैं मृत्युदंड के खिलाफ हूं। यदि यह भारतीय दंड संहिता में है तो दोनों ही इसके लायक हैं, कम से कम कोली इस सजा का हकदार है लेकिन पंधेर को लेकर संशय है।"

प्रमुख वकील आर.के.नसीम का मानना है कि 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामले में ही मृत्युदंड जायज है लेकिन निठारी मामले में इसे जायज नहीं माना जा सकता है।

दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण का कहना है, "वैसे मैं मृत्युदंड के खिलाफ हूं, लेकिन यह मामला अलग है। यह जघन्य अपराध का ऐसा मामला है, जिसमें शायद दोनों ही इस सजा के लायक हैं।"

एक अन्य वकील रिबिक्का मेनन ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मैं भी मृत्युदंड के खिलाफ हूं लेकिन इस मामले में समाज को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। "

राष्ट्रीय बाल अधिकार सुधार आयोग की सदस्य संध्या बजाज ने भी कहा कि अदालत का यह फैसला बच्चों की तस्करी करने वालों के लिए चेतावनी की तरह है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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